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अभी भी किसान ही समझो

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 लक्ष्य से नहीं भटको   / वीरेन्द्र सेंगर                 

किसान आंदोलन के लिए आज का शो अच्छा नहीं रहा।अहिंसा ही इस आंदोलन की बड़ी कामयाबी रही है। अनुशासन टूटा तो सत्ता को दमन चक्र चलाना और


आसान हो जाएगा।अहिंसक सत्ताग्रह की ताकत पर भरोसा करो।तय रूट को तोड़कर अच्छा संदेश नहीं गया।दोबारा यह भूल नहीं होनी चाहिए।तभी यह आंदोलन सार्थक हो पाएगा।                     सरकार को भी अंहकार छोड़कर जनपक्षीय रवैया अपनाना होगा।किसानों का यह ऐतिहासिक उबाल कमतर न समझें।संदेश साफ है कि देश का गण,शासन तंत्र से बहुत क्षुब्ध है।कृषि कानूनों से नाराजगी तो इसकी एक  झलक भर है।किसान नेताओं को भी भरोसा बढ़ा है कि आंदोलन देशव्यापी हो गया है।कोई सरकार इसे कुचल नहीं सकती।ऐसे में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गयी है।                                           ये किसान की ताकत है जिसके चलते सरकार ने गोली नहीं चलवाई।ये समझदारी वाली रणनीति रही।इसकी सराहना करनी होगी।लेकिन ये सदाशयता किसानों की ताकत के चलते ही आयी।आंदोलनकारियों का अपने ध्येय को ध्यान में रखना होगा।उन्होंने अपनी ताकत दुनिया में दिखा दी है।अब यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि आंदोलन अराजक हो रहा है।इस छवि से बचना होगा।संसद तक मार्च का जो एलान किया गया है।लोकतांत्रिक तरीका है।बशर्ते आंदोलन हिंसक टकराव से अपनी तरफ से बचे।आज के घटनाक्रम से किसान नेताओं को सबक लेना होगा।शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने के परिणाम हमेशा  जन गण के गुस्से को बढ़ाते हैं।सत्ता प्रभुओं को भी याद रखना होगा।क्योंकि अंहकारी सत्ता, जन के सामने हमेशा मिटती ही है। चाहे कुछ देर भले लगे।                    आज के शक्ति प्रदर्शन से ये बात साफ है कि आम लोगों में सत्ता के प्रति जबरदस्त गुस्सा है।आजादी के बाद अब तक किसानी क्षेत्र की उपेक्षा लगातार होती आयी है।उनकी टीस महज छह सालों की नहीं है।अब पीर पर्वत सी हुई है।ऐसे में युवा ग्रामीण भड़क गया है।वह मरने मारने पर आ रहा है।ये शुभ संकेत नहीं हैं।सांकेतिक रूप से ही सही किसानों ने लालकिला तक पंहुचकर ये जता दिया है कि वे सच्चे हक के लिए लालकिले तक अपना गुस्सा पंहुचा सकते हैं।ये नौबत आना शुभ संकेत नहीं हैं।न तंत्र के लिए न गण के लिए।सरकार को चाहिए कि कम से कम वो जिद्दीपन छोड़कर आंदोलनकारियों को संतुष्ट करे।वर्ना  आंदोलन व्यापक होगा।गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली में जो तंत्र और गण के बीच टकराव हुआ, अच्छा नहींहै।सरकार राजनीतिक सदाशयता दिखाकर लगभग हारी बाजी फिर जीत सकती है।गेंद तो सरकार के ही पाले में है।अच्छी उम्मीद कि जानी चाहिए।जय हिंद!


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