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के आसिफ उर्फ़ मुगले आज़म

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 हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा डायरेक्टर था जो अपनी सिर्फ एक फिल्म के लिए जाना जाता है। इस निर्देशक ने फिल्म बनाने की कोई खास ट्रेनिंग नहीं ली थी। इनका नाम था के आसिफ और पूरा नाम करीमुद्दीन आसिफ। बॉलीवुड के सफल फिल्म निर्माता और निर्देशकों की श्रेणी में टॉप पर रहने वाले के आसिफ को लोग पागल फिल्म डायरेक्टर भी कहते थे।

 इसकी वजह बहुत बड़ी थी। उनके जानने वालों के मुताबिक वह बड़े सनकी और जिद्दी इंसान थे। 14 जून 1922 को इटावा में जन्मे आसिफ एक बार जो सोच लेते थे उसे पूरा करके ही दम लेते थे। यही वजह थी कि लाख रुकावटों के बावजूद उन्होंने अपनी फिल्म मुगल-ए-आजम को पूरा कर लिया। लगातार 14 सालों तक फिल्म का निर्माण चलता रहा।


इनका जन्म 14 जून 1922 को हुआ था और 9 मार्च 1971 को वह इस दुनिया से रुख्सत हो गए। उन्होंने अपनी जिन्दगी में केवल दो फिल्में बनाईं ‘फूल'(1945) और ‘मुग़ल-ए-आज़म’ (1960)। उनकी पहली फिल्म तो कुछ खास कमाल नहीं कर सकी लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ ने इतिहास बना दिया। इस फिल्म ने हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोगों को प्रभावित किया। इस फिल्म का स्टारडम इस कदर बढ़ा कि दिलीप कुमार सुपरस्टार बन गए। यह फिल्म दिलीप कुमार के करियर की एतिहासिक फिल्म साबित हुई। फिल्म में दिलीप कुमार, मधुबाला और पृथ्वीराज कपूर के किरदार आज भी क्लासिक माने जाते हैं।


चौदह सालों में 1.5 करोड़ की लागत से बनी फिल्म मुगल-ए-आजम के एक गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’ को फिल्माने में 10 लाख रुपये खर्च किये गए थे। ये उस दौर की वो रकम थी जिसमें एक पूरी फिल्म बन कर तैयार हो जाती थी। 105 गानों को रिजेक्ट करने के बाद नौशाद साहब ने ये गाना चुना था। 


के आसिफ की शादी दिलीप कुमार की बहन अख्तर बेगम से हुई थी। एक बार अख्तर बेगम और आसिफ में झगड़ा हुआ। दिलीप बीच-बचाव करने पहुंचे तो आसिफ ने उनसे कह दिया कि अपना स्टारडम मेरे घर से बाहर रखो। दिलीप कुमार उनकी इस बात से बेहद नाराज हुए। दिलीप का के आसिफ के प्रति नाराजगी का आलम ये था कि वो फिल्म के प्रीमियर तक में नहीं गए थे। 


1960 में बनी इस फिल्म का सेट उस दौर में अपनी भव्यता के लिए खूब चर्चा में रहा था। फिल्म 'मुगल-ए-आजम का गाना 'प्यार किया तो डरना क्या'लाहौर किले के शीशमहल की हूबहू कॉपी में शूट किया गया था और इस शीशमहल की इस कॉपी यानी सेट को बनाने में ही 2 साल का समय लग गया था। यह उस दौर में भारत का सबसे महंगा फिल्म सेट था, जिसे बनाने में करीब 15 लाख का खर्च आया था।


मुगल ए आज़म से जुड़ा एक और किस्सा बेहद मशहूर है। जब कई साल पहले मुगल ए आज़म की शूटिंग शुरू हुई थी तो दिलीप कुमार और मधुबाला की प्रेम कहानी जोर शोर से चल रही थी, लेकिन करीब 10 साल में पूरी हुई मुगल ए आज़म में जिस दौर में थप्पड़ वाला ये सीन शूट हुआ, उस वक्त तक इन दोनों की राहें अलग हो चुकी थी। इस सीन के दौरान दिलीप कुमार ने मधुबाला को गाल पर पूरी ताकत से झन्नाटेदार थप्पड़ रसीद कर दिया। शॉट तो ओके गया, लेकिन थप्पड़ की गूंज के बाद पूरे सेट पर कुछ देर के लिए शांति छा गई थी।


स्त्रोत ~ amarujala.com


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