खो गयी खनक भरी आवाज़ / विवेक शुक्ला
आकाशवाणी के प्रख्यात हिन्दी न्यूज रीडर रामानुज प्रसाद सिंह की मृत्यु से ईस्ट दिल्ली के आई.पी.एक्सटेंशन एरिया की आकाश भारती सोसायटी में रहने वाले उनके साथी राजेन्द्र अग्रवाल अपने पटना लॉ कॉलेज के दिनों की स्मृतियों में चले गए हैं। तब दोनों सहपाठी थे।
रामानुज प्रसाद सिंह सन1961 में आकाशवाणी दिल्ली में आ गए थे। वे दिल्ली में आकर भी राजेन्द्र अग्रवाल को भूले नहीं। उन्हें प्रेरित करते रहे कि वे भी न्यूज रीडर का टेस्ट देकर दिल्ली आ जाएं। यही हुआ। राजेन्द्र अग्रवाल 1964 में दिल्ली आ गए। फिर दोनों ने आकाशवाणी में न्यूज रीडर के रूप में भी दशकों साथ-साथ काम किया। राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर के भतीजे रामानुज प्रताप सिंह का बुधवार को गुरुग्राम में निधन हो गया था। वे राजधानी में एंड्रयूज गंज और साकेत में भी रहे।
मौजूदा खबरिया चैनलों के कोलाहाल में याद रहेगा रामानुज प्रसाद सिंह का समाचारों को पढ़ने का अलग अंदाज। उनका उच्चारण अतुल्नीय था। वे आकाशवाणी की हिन्दी सेवा के शिखर पुरुष देवकीनंदन पांडे को अपना गुरु मानते थे।
उन्हीं से रामानुज प्रसाद सिंह ने शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना सीखा था। रामानुज जी की पत्नी मणिमाला जी और साली माधुरी जी आकाशवाणी की नेपाली सेवा में न्यूज रीडर थीं।
देवकीनंदन पांडे से बेहतर कोई नहीं
अब जब आकाशवाणी के न्यूज रीडर रामानुज प्रसाद सिंह नहीं रहे हैं, तो देवकीनंदन पांडे जी की याद आना लाजिमी है। शायद ही कोई हिन्दी न्यूज रीडर हो जो देवकीनंदन पांडे की आवाज का कायल ना रहा हो। दरअसल एक दौर था जब देश आकाशवाणी से प्रसारित होने वाली खबरों को गंभीरता से सुनता था। वे 1948 में आकाशवाणी दिल्ली से जुड़े थे।
पांडे जी बताते थे कि हालांकि उन्होंने हजारों बार खबरें पढ़ीं, पर नेहरु जी और श्रीमती इंदिरा गांधी की मृत्यु के समाचारों को पढ़ते हुए उनके हाथ कांप रहे थे। इतनी बड़ी शख्सियतों की मृत्यु का सामाचार पढ़ना कोई आसान नहीं था। देवकीनंदन पांडे अपने साथी न्यूज रीडर अशोक वाजपेयी के खबरों के पढ़ने के स्टाइल के कायल थे। पांडे जी की शख्सियत बहुत शानदार थी।
उनके साथी उनसे नुक्ते के प्रयोग से लेकर शब्दों के सही उच्चारण को सीखा करते थे। दूरदर्शन की मशहूर न्यूज रीडर सलमा सुलतान भी देवकीनंदन पांडे को अपना गुरु कहती हैं! वे किदवई नगर के फ्लैट में रहते थे। उनके पास रिटायर होने के बाद अपना घर तक नहीं था! तब केंद्रीय मंत्री वसंत साठे ने उन्हें लक्ष्मी बाई नगर में घर दिलवाया था! अंत मे वे आई.पी. एक्सटेंशन की आकाशभारती सोसायटी में रहने लगे थे।
इन्हें भी सुनता था सारा देश
आकाशवाणी की लोकप्रिय समाचार वाचिकाओं में विनोद कश्यप भी थीं। 30 वर्षों से अधिक समय तक अपनी आवाज़ से समाचारों को घर घर पहुंचाने वाली विनोद जी 1992 मे आकाशवाणी से रिटायर हुईं थीं। उनकी 2019 में मृत्यु हो गई थी। विनोद कश्यप ने ही देश को भारत-चीन युद्ध, भारत पाकिस्तान युद्ध ( 1965, 1971), और लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के समाचार सुनाए थे।
विनोद कश्यप को देवकीनंदन पांडे के बाद आकाशवाणी के सबसे लोकप्रिय समाचार वाचक के रूप में देखा जाता था। देवकीनंदन पांडे और विनोद जी प्राय: आकाशवाणी के सुबह 8 बजे या फिर रात 9 बजे के 15 मिनट के बुलेटिनों को पढ़ा करती थीं। इन दोनों बुलेटिनों को करोड़ों लोग सुन कर देश-दुनिया की हलचलों को जान पाते थे।
विनोद कश्यप के अलावा, उस दौर में इंदु वाही,जयदेव त्रिवेदी,मनोज मिश्र,अनादि मिश्र वगैरह भी लोकप्रिय न्यूज रीडर हुआ करते थे।
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PICTURES-RAMANUJ PRASAD SINGH AND PANDE JI.