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पत्रकारिता पर चिंतन - डॉ. रामजी लाल जांगिड

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 009 (09/10/2024)

*वर्ष 1968 में पत्रकारिता की दशा और दिशा*


Dr- रामजी लाल जांगिड 


 

भारत में पत्रकारिता की शिक्षा अंग्रेजी में वर्ष 1920 में मद्रास में शुरू की गई थी। वर्ष 1941 में अंग्रेजी में ही लाहौर स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षा शुरू की गई। वर्ष 1938 में अलीगढ़‌ मुस्लिम विश्वविद्यालय में भी शिक्षा शुरू की गई। आज़ादी के बाद 1947 में मद्रास विश्व विद्यालय में, 1950 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में, 1951 में मैसूर विश्वविद्यालय में, 1952 में नागपुर विश्वविद्यालय में, 1954 में उस्मानिया विश्वविद्यालय (हैदराबाद) में और 1964 में बैंगलुरू में अंग्रेजी में पत्रकारिता की शिक्षा शुरू की गई। इस विवरण से स्पष्ट है कि वर्ष 1941 से 1964 तक जिन आठ भारतीय विश्वविद्यालयों में पत्रकारिता की शिक्षा दी जा रही थी, वह केवल अंग्रेजी में थी और अलीगढ़ को छोड़ दें तो सब अहिन्दी भाषी राज्यों में उपलब्ध थी। अब प्रश्न उठता है कि नई दिल्ली और हिन्दी अखबारों के अन्य प्रकाशन स्थानों पर हिन्दी के पत्रकार कहां से आते थे? जनवरी 1968 में जब मैंने 'हिन्दुस्तान " (हिन्दी दैनिक) में काम करना शुरू किया तब कई सम्पादक और पत्रकार गुरुकुलों में पढ़े हुए थे उन्होंने पत्रकारिता की शिक्षा तो नहीं ली थी, अगर संस्कृत और हिन्दी पर उनकी पकड़ थी। वे सब स्नातक ही थे। बाद में एम. ए. तक शिक्षा पाने वाले आने लगे। छोटे अखबारों में ऐसे भी लोग थे जो स्नातक भी नहीं थे। लेकिन वे काम करते करते संपादन सीख गए थे।1968 में नई दिल्ली के पत्रकारों में मैं पहला और ऐसा अकेला पत्रकार था, जो राजस्थानी था और पी. एच. डी. उपाधि प्राप्त था। इसके अलावा मेरे लेख अंग्रेजी और हिन्दी दोनों भाषाओं में छप चुके थे। मैं राजस्थान साहित्य अकादमी से पुरस्कार पा चुका था। और मैंने हिन्दी तथा अंग्रेजी में चार पुस्तकें लिखी थीं। मेरा श्रव्य माध्यम और विज्ञापन कला से सम्बंध भी रहा था। इसलिए मेरा चुनाव हिंदुस्तान टाइम्स लि. के मैनेजर ने तुरंत कर लिया। वर्ष 1982 में दूसरे प्रेस आयोग ने 542 पत्रकारों का सर्वेक्षण किया, तो पता चला कि उनमें से 201 स्नातक भी नहीं थे। 460 के पास पत्रकारिता का प्रशिक्षण नहीं था। मगर 122 के पास एम. ए. की उपाधि थी। हिन्दी दैनिक के लिए

सही हिन्दी लिखना पत्रकार की बुनियादी योग्यता होनी चाहिए। मगर पंजाब विश्वविद्यालय ने कुछ वर्षों पहले युवा पत्रकारों के भाषा ज्ञान की परीक्षा ली तो पता चला कि एक भी युवा पत्रकार ने हिन्दी में एक भी सही वाक्य नहीं लिखा था। हो सकता है वे अपनी भाषा में अच्छे होंगे।

'हिन्दुस्तान'और 'नवभारत टाइम्स'के पत्रकार अन्य शहरों के पत्रकारों की तुलना में अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद करने में अधिक कुशल माने जाते थे। उनका चयन भी लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद होता था। हालांकि कुछ ऐसे भी पत्रकार थे, जो पहले छोटे अखबारों में काम कर चुके थे। मगर बाद में पत्रकारिता की शिक्षा लेकर युवक और युवतियां आने लगीं।



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