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मलयालम पत्रकारिता

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प्रस्तुति- प्रतिमा यादव, मनीषा यादव 




आधुनिक केरल के सामाजिक सांस्कृतिक निर्माण में पत्रकारिता ने निर्णयात्मक भूमिका अदा की है । पत्रकारिता ने मलयालम भाषा का विकास, मुद्रण कला का विकास, नागरिकाधिकार-बोध का विकास आदि का पथ प्रशस्त किया । जाति प्रथा के विरुद्ध किया गया संघर्ष राजनीतिक स्वायत्त शासन संग्राम, आदि को पत्रों ने असीम सहायता पहुँचाई । पाश्चात्य धर्मप्रचारकों ने धर्म प्रचार के लिए जो पत्रिकाएँ प्रारंभ कीं वे ही मलयालम के आदिकालीन पत्र माने जाते हैं । 'राज्यसमाचारम', 'पश्चिमोदयम्'आदि उदाहरण के रूप में लिए जा सकते हैं । 'ज्ञाननिक्षेपम्'पत्रिका में धर्मप्रचार के साथ ज्ञान का प्रचार-प्रसार भी लक्ष्य बनाया गया ।

वास्तविक अर्थ में समाचार पत्र का प्रारंभ 1860 के बाद ही हुआ । अंग्रेज़ी में प्रकाशित 'वेस्टर्न स्टार', मलयालम पत्र 'पश्चिमतारका', 'केरल पताका', 'संदिष्टवादी', 'दीपिका', 'केरलमित्रम', 'केरल पत्रिका', 'केरल संचारी'आदि पत्रों को उदाहरण के रूप में लिया जा सकता है । मलयालमनोरमा का प्रारंभ 1890 में हुआ जिसने मलयालम पत्रकारिता में नया मार्ग प्रशस्त किया । प्रारंभकालीन पत्रों का उद्देश्य समाज सुधार था । 'मलयाली', 'सुजनानन्दिनी', 'मितवादी', 'केरलकौमुदी', 'देशाभिमानी'आदि पत्र इस उद्देश्य से शुरू किए गए । 20 वीं शताब्दी के प्रथम दशक में अनेक पत्र शुरू हुए जो राजाओं के शासन के विरुद्ध नागरिकाधिकार की प्रतिष्ठा में लगे थे । ऐसे पत्र हैं - 'केरलदर्पणम', 'केरलपंचिका', 'स्वदेशाभिमानी', 'केरल चिन्तामणि', 'समदर्शी, प्रबोधकन'आदि । स्वतंत्र एवं निर्भीक रूप में पत्रकारिता में लगे स्वदेशाभिमानी रामकृष्ण पिळ्ळै, केसरी ए. बालकृष्ण पिळ्ळै दोनों ने मलयालम पत्रकारिता में नवीन इतिहास रचा । स्वदेशाभिमानी को देश से निकाल दिया गया । केसरी ने नागरिकाधिकार के पक्ष में खड़े होकर राजाओं के शासन का विरोध किया ।

ब्रिटिश शासन के विरोध में स्वतंत्रता संग्राम को प्रेरणा देने के लिए अनेक पत्र आरंभ किए गए । 'स्वराज', 'मातृभूमि', 'अल अमीन', 'मलयालराज्यम', 'गोमती', 'दीनबंधु', 'देशाभिमानी'आदि पत्रों का आविर्भाव स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ था । 1923 में उद्घाटित मातृभूमि ने महान प्रेरणा दी । कम्यूनिस्ट आन्दोलन तथा भारतीय राष्ट्रीय कॉग्रेस ने मलयालम पत्रकारिता के विकास में बड़ा योगदान दिया ।

मलयालम पत्रकारिता का विकास का पथ सरल नहीं था । बहुत सी पत्रिकाएँ जो साप्ताहिक तथा मासिक पत्रिकाओं के रूप में शुरू हुईं असमय में ही बन्द हो गईं । कतिपय पत्र ही दैनिकी बन सके । प्रारंभकालीन जिन पत्रों ने कठिन स्थितियों का सामना करते हुए विकास किया वे हैं - 'मलयालमनोरमा', 'मातृभूमि', 'केरल कौमुदी', 'चन्द्रिका', 'देशाभिमानी'और 'दीपिका'। 'माध्यमम्', 'मंगलम'आदि पत्र का प्रारंभ 1980 में ही हुआ ।

समाचार पत्रों के साथ-साथ मलयालम में समकालीन पत्रिकाएँ तथा प्रकाशन भी शुरू हुए । समाचार मासिकाएँ, विशिष्ट मासिकाएँ, सामुदायिक मासिकाएँ आदि तीन प्रकार की मासिक पत्रिकाएँ प्रचलित हुईं । इन्हीं के साथ साहित्यिक पत्रकारिता भी विकसित हुई । जो 1950 के बाद 'लिटिल मैगज़ीन'नाम से शुरू हुई थी ।

केरल के पत्रकारों के संगठन का नाम है 'केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जेर्णलिस्ट'। सभी जिला केन्द्रों में 'प्रेस क्लब'की स्थापना हुई ।

पत्रकारिता के विकास के लिए 'केरल प्रेस अकादमी'कार्यरत है जो कोच्चि में है ।

उद्योग-व्यवसाय के रूप में केरल में पत्रों की बुनियाद बहुत ही पक्की है । 'मलयालमनोरमा', 'मातृभूमि', 'केरल कौमुदी', 'देशाभिमानी', 'चन्द्रिका', 'माध्यमम्'आदि पत्र - ग्रूप अनेक संबद्ध प्रकाशन भी करते रहते हैं । भारत की सर्वाधिक प्रचलित पत्रों में 'मलयालमनोरमा'और 'मातृभूमि'की गणना की जाती है । 'द हिन्दू' (कोच्चि, तिरुवनन्तपुरम) और 'द न्यू इंडियन एक्स्प्रेस' (कोच्चि, कोष़िक्कोड, तिरुवनन्तपुरम) पत्रों के एक से अधिक संस्करण केरल से निकलते  हैं । 

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