गणित में, 1 − 2 + 3 − 4 + · · ·एक अनन्त श्रेणीहै जिसके व्यंजक क्रमानुगत धनात्मक संख्याएंहोती हैं जिसके एकांतर चिह्नहोते हैं। अनन्त श्रेणी के अपसरणका मतलब यह है कि इसके आंशिक योग का अनुक्रम (1, −1, 2, −2, ...)किसी परिमित मानकी ओर अग्रसर नहीं होता है। बहरहाल, 18वीं शताब्दी के मध्य में लियोनार्ड आयलर1 − 2 + 3 − 4 + · · · = 1⁄4बताया। दशक 1980 के पूर्वार्द्ध में अर्नेस्टो सिसैरा, एमिल बोरेलतथा अन्यों ने अपसारी श्रेणियों को व्यापक योग निर्दिष्ट करने के लिए सुपरिभाषितविधि प्रदान की – जिसमें नवीन आयलर विधियों का भी उल्लेख था। इनमें से विभिन्न संकलनीयता विधियों द्वारा 1 − 2 + 3 − 4 + · · ·का "योग"1⁄4लिख सकते हैं। सिसैरा-संकलनउन विधियों में से एक है जो 1 − 2 + 3 − 4 + ...का योग प्राप्त नहीं कर सकती, अतः श्रेणी एक ऐसा उदाहरण है जिसमें थोड़ी प्रबल विधि यथा एबल संकलनविधि की आवश्यकता होती है। श्रेणी 1 − 2 + 3 − 4 + ..., ग्रांडी श्रेणी1 − 1 + 1 − 1 + ...से अतिसम्बद्ध है। आयलर ने इन दोनों श्रेणियों को श्रेणी 1 − 2n + 3n− 4n + · · ·जहाँ (nयदृच्छ है), की विशेष अवस्था के रूप में अध्ययन किया और अपने शोध कार्य को बेसल समस्यातक विस्तारित किया। बाद में उनका ये कार्य फलनिक समीकरणके रूप में परिणत हुआ जिसे अब डीरिख्ले ईटा फलनऔर रीमान जीटा फलनके नाम से जाना जाता है। (विस्तार से पढ़ें...)
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, भारत सरकारके रक्षा मंत्रालयके अधीन एक सैन्य एवं नागरिक उपकरण एवं संयंत्र निर्माणी है। भारत सरकारद्वारा सन १९५४ में सैन्य क्षेत्र की विशेष चुनौतीपूर्ण आवश्यकताऐं पूरी करने हेतु रक्षा मन्त्रालय के अधीन इसकी स्थापना की गई थी। इलेक्ट्रानिक उपकरण व प्रणालियों का विकास तथा उत्पादन देश में ही करने के उद्देश्य से इसका पहला कारखाना बंगलुरूमें लगाया गया था, किन्तु आज यह अपनी नौ उत्पादन इकाईयों, कई क्षेत्रीय कार्यालय तथा अनुसन्धान व विकास प्रयोगशालाओं से युक्त सार्वजनिक क्षेत्र का एक विशाल उपक्रम है, जिसे अपने व्यावसायिक प्रदर्शन के फलस्वरूप भारत सरकार से नवरत्न उद्योगका स्तर प्राप्त हुआ है। बंगलुरू मे मुख्य नैगमिक कार्यालय तथा एक विशाल उत्पादन इकाई के अतिरिक्त अन्य उत्पादन इकाईयाँ गाजियाबाद, पंचकुला, कोटद्वार, हैदराबादव मछलीपत्तनम, नवी मुंबईव पुणे, तथा चेन्नईमें स्थापित हैं। विस्तार में...