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IIMC में क्या पढ़ाया जाता हैं? / डॉ. रामजीलाल जांगिड

 0812   (08/12/2024)


भारतीय जनसंचार संस्थान में क्या पढ़ाया जाता रहा है?


डॉ. रामजीलाल जांगिड 




भारतीय जन संचार संस्थान ने आज़ादी के बाद पत्रकारिता और जन संचार के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसने भारत और 160 देशों के पत्रकारों तथा संचार कर्मियों को विकासशील देशों में विकास के लिए जन संचार की उपयोगिता के बारे में जागरूक किया है। इसके पहले विकासशील देशों के पत्रकार और पत्रकारिता की शिक्षा पाने के इच्छुक युवा तथा युवतियां इंग्लैंड एवं अमरीका के विश्वविद्यालयों में जाते थे किन्तु वहां के शिक्षक विकासशील देशों की समस्याओं से अनभिज्ञ थे। इसलिए उनकी शिक्षा का लाभ गरीबी और अशिक्षा से जूझ रहे देशों को नहीं मिल पाता था। इसलिए भारत ने विकासशील देशों के पत्रकारों के लिए भारतीय जनसंचार संस्थान की स्थापना करके एक विकल्प दिया। निर्गुट देशों के लिए संवाद समिति भारत में ही बनी।

भारतीय जन संचार संस्थान ने अप्रैल और मई 1969 में भारतीय उर्वरक निगम के अधिकारियों के लिए आयोजित

"Communication for Agricultural Inputs"

पाठ्यक्रम में जो विषय पढाए, उससे पता चल जाएगा कि इस संस्थान में क्या पढ़ाया गया ?  इस पाठ्यक्रम का उद्‌घाटन तत्कालीन खाद्य, कृषि, सामुदायिक विकास और सहकारिता मंत्री श्री जगजीवन राम ने किया था। इसके पाठ्यक्रम निदेशक थे प्रो. (डॉ.) ए.वी. षण्मुखम थे। पढ़ाये गए विषय थे :-

1. फिल्में और जन संचार

2. विदेशों में भारत की छवि कैसे बनाएं 

3. भारत में रंगमंच

आंदोलन 

4. विकासशील समाज में संचार के रास्ते में

आने वाली समस्याएं 

5. Cross Cultural

Communication 

6. विकासशील समाज में

पत्रकार की भूमिका 

7. इंग्लैड में सरकारी सूचना तंत्र

8. अमरीका में सरकारी सूचना तंत्र 

9. Agricuctural

Inputs 

10. कृषि के विकास की प्रक्रिया 

 11.  Functions

and Organisational Set up of the Agricultural

Information Units in the IADP districts

12. Green Revolution 

13. भारतीय उप महाद्वीप का ऐतिहासिक विकास- प्राचीन भारत 

14. भारतीय फिल्म

संस्थान। 

एक तरह से इसमें सभी आयामों से अवगत कराया गया। 27 प्रशिक्षुओं को तत्कालीन सूचना, प्रसारण और संचार मंत्री श्री सत्य नारायण सिन्हा ने समापन पर प्रमाणपत्र दिए। इन्हें 9 भारतीय और 5 विदेशी विशेषज्ञों ने सम्बोधित किया। इन प्रशिक्षुओं को न्यूयार्क स्थित संयुक्त राष्ट्र प्रशिक्षण व शोध संस्थान के कार्यकारी निर्देशक श्री एस.ओ. एडेबो ने भी संबोधित किया। भारत के तत्कालीन सूचना व प्रसारण राज्य मंत्री श्री इंद्र कुमार गुजराल ने भी इन प्रशिशुओं से बातचीत की। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि संस्थान ने प्रशिक्षण का स्तर ऊंचा रखने के लिए हर संभव प्रयास किया।


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