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कुमकुम की यादें / रतन भूषण

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 कुमकुम भी चली गईं सबको करके पार 


अभी कुछ दिनों पहले ही अभिनेता धर्मेन्द्र ने एक हीरोइन के साथ वाली अपनी फोटो सोशल मीडिया पर डालकर यह खुलासा किया कि उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म की हीरोइन से ही कह दिया था कि मुझसे शादी करोगी? फ़िल्म का हश्र क्या हुआ और आगे की कहानी जानते हैं विस्तार से। बहुत कोशिश के बाद धर्मेन्द्र को 1960 में एक फ़िल्म मिली अर्जुन हिंगोरानी निर्देशित दिल भी तेरा हम भी तेरे। इसी से उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी, मगर फिल्म फ्लॉप रही। फिल्म की रिलीज के 58 साल बाद धर्मेंद्र ने फिल्म की लीड ऐक्ट्रेस कुमकुम को इस फ़िल्म के फ्लॉप होने के लिए जिम्मेदार ठहराया था। धर्मेंद्र ने अपना और हीरोइन कुमकुम का फोटो शेयर करते हुए ट्वीट किया और उस पर उन्होंने कैप्शन लिखा, मेरी मुख्तसर सी प्यारी सी हीरोइन कुमकुम। अपनी पहली ही फिल्म में मैं इनसे कह बैठा था दिल भी तेरा हम भी तेरे, लेकिन इनसे कुबूल न हुआ, शायद इसी वजह से यह फिल्म फ्लॉप हो गई।

धर्मेन्द्र की यह पहली फ़िल्म जरूर थी, लेकिन कुमकुम ने कई फिल्मों में काम किया था। वो बहुत सीनियर तो थी ही, संभव है, वे इस वजह से भी शादी के लिए राज़ी नहीं हुई हों। यह भी वजह हो सकती है कि तब उनकी स्थिति अच्छी नहीं थी, क्योंकि उनका अभिनय की दुनिया में आना मजबूरी था। वे तब मुसीबत की मारी थीं, परिवार का बोझ था, जिम्मेदारी थी। आइए जानते हैं, हमसे देर रात जुदा होने वाली अभिनेत्री कुमकुम के बारे में, जिन्होंने तमाम बड़े अभिनेताओं के साथ बहुत सी बड़ी और हिट फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी किस्मत में बड़ी हीरोइन कहलाना नसीब नहीं हुआ। बस उनका अभिनय सफर चलता रहा और वे फिल्में करती गईं।

अच्छा होगा कि कुमकुम पर फिल्माए गए कुछ गीतों को हम जान लेते हैं। इसके जरिये उन्हें याद करना आसान होगा। मेरा नाम है चमेली में हूं मालिन अलबेली..., घूंघट नहीं खोलूंगी सइयां तोरे आगे..., तेरा जलवा जिसने देखा वो तेरा हो गया..., दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूंढ रहा है..., मुझको इस रात की तन्हाई में आवाज़ न दो..., कभी आर कभी पार लागा तीरे नज़र..., मधुबन में राधिका नाचे रे गिरिधर की..., मचलती हुई हवा के संग संग हमारे संग संग चले गंगा की लहरें... आदि।

अपने अभिनय सफर में कुमकुम ने कुल 112 फिल्मों में काम किया। यह नाम उन्हें कुछ फिल्मों में आने के बाद 1954 में मिला और वह फ़िल्म थी सोहराब मोदी की मिर्ज़ा ग़ालिब, जिसमें मुख्य भूमिका भारत भूषण और सुरैया की थी। कुमकुम का असली नाम है जेबुनिस्सा। उनका जन्म 22 अप्रैल 1934 को हुसेनाबाद, बिहार में हुआ था, जो अब शेखपुरा जिला में है। उनके पिता नवाब थे, उनकी काफी जायदाद थी। नाम था सैयद नवाब मंसूर हसन। कुमकुम की मां का नाम था ख़ुर्शीद बानो। कुमकुम को इस बात के लिए अक्सर डांट पड़ती थी कि उनका नाच गाने में मन लगता था, पढ़ने में नहीं। कुछ साल बाद वक़्त बदला और सरकार ने नवाबी खत्म कर दी और सारी जायदाद अपने कब्जे में ले ली। अब परिवार पर मुसीबत आ गयी। उनके कुछ परिजन कलकत्ता में रहते थे, तो वे भी वहां गए और वहां एक जायदाद थी, जिसे बेचकर कुछ वक्त गुज़ारा। यहीं नवाब साहब की एक महिला से संगत हो गयी, जिससे उन्होंने शादी कर ली और एक दिन कुमकुम और उनकी मां को छोड़ पाकिस्तान चले गए।

बचपन में किये शौकिया डांस को करियर बनाने के उद्देश्य से कुमकुम ने मां के साथ इरादा किया और रिश्तेदारों से कुछ पैसे लेकर बम्बई के लिए चल दीं।

बम्बई आने के बाद कुमकुम को कुछ लोगों ने यह सुझाव दिया कि फ़िल्म में काम करने के लिए सही से नाचना आना चाहिए, तो उन्होंने पंडित शम्भू महराज से कथक की ट्रेनिंग ली। 

कुछ समय बाद कुमकुम को पहली फ़िल्म मिली 1947 में शहनाई, जिसमें उनका बहुत छोटा काम था। चार और फिल्मों में छोटी भूमिकाएं करने के बाद उन्हें गुरुदत्त की फ़िल्म आर पार में टाइटल सांग करने को मिला, लेकिन इसमें क्रेडिट नहीं मिला। यह गीत पहले यह तय हुआ था कि हास्य कलाकार जगदीप पर फिल्माया जाएगा, पर गुरुदत्त ने कहा कि हम इसे किसी लड़की पर फिल्माएंगे। पर इस छोटी भूमिका को कोई हीरोइन करने को तैयार नहीं हुई, तो कुमकुम को लिया गया। इस गीत से वे चर्चा में आ गईं और इसी साल आयी मिर्ज़ा ग़ालिब से उन्हें नाम मिलना शुरू हो गया। कुमकुम ने मिस्टर एंड मिसेज 55, प्यासा, मिस्टर एक्स इन बॉम्बे, उजाला, फंटूश, सीआईडी, बसंत बहार, नया दौर, मदर इंडिया, शरारत, काली टोपी लाल रुमाल, कोहिनूर, दिल भी तेरा हम भी तेरे, सन ऑफ इंडिया, गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो, लगी नहीं छूटे राम, गंगा की लहरें, गीत, आंखें, ललकार, एक सपेरा एक लुटेरा, राजा और रंक आदि फिल्मों में काम किया और खूब नाम कमाया। उनके अभिनय और डांस को लोग आज भी याद करते हैं, जिसका क्रेडिट वे अपने गुरु पंडित शम्भू महराज को देती रहीं। भोजपुरी फ़िल्मों में भी उन्होंने काम किया और अच्छी चर्चा पाई।

1973 में कुमकुम ने सज्जाद अकबर खान से शादी कर ली, जो बिजनेसमैन थे और फिल्मों में काम करना पूरी तरह बंद कर दिया और सउदी अरब चली गईं। उनका मानना था, पैसा उतना ही कमाओ जितना खर्च कर सको और ज़िन्दगी जीने के लिए मुनासिब हो। पैसा हो और खर्च करने के लिये वक़्त ही न हो, तो ऐसे पैसे का क्या फायदा? काफी समय वहां रहने के बाद वे मुम्बई रहने आ गई थीं। उनकी एक बेटी हैं अंदलीब। तमाम हिट गीतों पर ठुमकने वाली अभनेत्री कुमकुम अब हमारे बीच नहीं हैं। वे कुछ दिनों से बीमार थीं। कल देर रात उनका निधन हो गया। 

-रतन भूषण 



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