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Channel: पत्रकारिता / जनसंचार
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छेती कोरोना मुका वे रब्बा,

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 छेती कोरोना मुका  वे रब्बा,

आवे सुख दा साह वे रब्बा।

घर विच रह रह अक्क गये हाँ,

कल्ल्या बह बह पक गए हाँ।

भांडे धो धो थक गए हाँ।

कुछ ते तरस खा वे रब्बा।

छेती कोरोना मुका वे रब्बा।


पका पका के अक्क गए हाँ,

पोछे मार मार थक गये हाँ,

खिला बाहर दी हवा वे रब्बा।

हुन ते कोरोना मुका वे रब्बा।


मेरा वी सजन नू जी करदा है,

वधिया पाण नू जी करदा है,

तुरन फिरन नू जी करदा है,

नचन गान नू जी करदा है,

Maid तों Madam बना वे रब्बा।

छेती कोरोना मुका वे रब्बा।

कुछ ते तरस खा वे रब्बा।


घर दे चावल दाल खपा दित्ते ने,

पंज पंज किलो वधा लीत्ते ने,

सजन यार भुला दित्ते ने,

मुरगे टिकके छुड़ा दित्ते ने,

हुन ते पार्टी करा दे रब्बा,

किट्टी शिट्टी करा वे रब्बा।

छेती कोरोना मुका वे रब्बा।

आवे सुख दा साह वे रब्बा।


चीनियां दे सिर स्वाह वे रब्बा,

एना दे गले विच फाह वे रब्बा

छेती कोरोना मुका वे रब्बा।

आवे सुख दा साह वे रब्बा।


रामेश्वर  दयाल 

🌹🌹😊🌹🌹


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