शुक्रवार, 28 दिसंबर, 2012 को 13:42 IST तक के समाचार

आंध्र प्रदेश में पृथक तेलंगाना राज्य की माँग को लेकर कई सालों से आंदोलन चल रहा है
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने दावा किया है कि आंध्र प्रदेश के बँटवारे और पृथक तेलंगाना राज्य की साठ साल पुरानी माँग पर एक माह में अंतिम फ़ैसला हो जाएगा.
शिंदे ने शुक्रवार सुबह दिल्ली में हुई ‘अंतिम’ सर्वदलीय बैठक के बाद पत्रकारो के सामने यह घोषणा की.इस बैठक में आंध्र प्रदेश के आठ मुख्य राजनैतिक दलों के दो-दो प्रतिनिधियों ने भाग लिया. यूं तो ज्यादातर निगाहें आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के रुख पर थीं, लेकिन शिंदे ने इस बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं किया. शिंदे ने आंध्र के विरोधियों और समर्थकों को शांत रहने को कहा और दावा किया किया जो भी हल निकाला जाएगा वो सबको शांति देगा.
कांग्रेस आलाकमान इस मामले में बहुत फूँक-फूँक कर कदम उठा रहा है. इस सन्दर्भ में पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से गुरुवार को भेंट भी की थी.
उम्मीद
आमतौर पर इस बैठक से किसी नाटकीय परिणाम की उम्मीद नहीं की जा रही है. अलग राज्य के लिए लड़ने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव ने कहा कि यह बैठक कांग्रेस का एक खेल है.उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने यह बैठक केवल इसलिए बुलाई है कि उसे एफडीआई के मुद्दे पर संसद में मतदान के दौरान पराजय का डर था और वो तेलंगाना के कांग्रेसी सांसदों को खुश करना चाहती थी."
पार्टी की पोलित ब्यूरो में इस सवाल पर काफी बहस हुई कि पार्टी का रुख क्या होना चाहिए. लेकिन इसकी सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई.
कहा जा रहा है कि पहले कांग्रेस पार्टी और केंद्र सरकार को अपना रुख स्पष्ट करना होगा.
इससे पहले तेलुगुदेशम के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू कह चुके हैं कि उनकी पार्टी तेलंगाना की विरोधी नहीं है.
खुद कांग्रेस के अन्दर इस मुद्दे पर गंभीर प्रांतीय मतभेद चले आ रहे हैं. तेलंगाना के नेता अलग राज्य चाहते हैं और आंध्र और रायलसीमा के नेता उसका विरोध कर रहे हैं.
तेलंगाना से कांग्रेस के सांसद पुनम प्रभाकर ने चेतावनी दी है की अगर इस बैठक में तेलंगाना के पक्ष में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और तेलंगाना की जनता कांग्रेस को उखाड़ फेंकेगी.

शिंदे ने दावा किया किया जो भी हल निकाला जाएगा वो दोनों पक्षों को शांति देगा.
तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तेलंगाना राज्य के पक्ष में हैं जबकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन उसका विरोध कर रहे हैं. कांग्रेस की ही तरह वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने भी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है.
चेतावनी
इस बीच तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक प्रोफेसर कोदंडा राम ने चेतावनी दी है कि जो भी राजनैतिक दल इस बैठक में तेलंगाना के विरुद्ध बात करेगा उसके लिए इस क्षेत्र में कोई जगह नहीं होगी और जनता उसका सफाया कर देगी.साल 2009 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर रही है. लेकिन जब इसके बाद आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों के सौ से ज्यादा विधायकों ने त्यागपत्र दे दिया तो केंद्र को अपना रुख बदलना पड़ा और उसने श्री कृष्णा समिति का गठन किया.
कई महीनों के काम के बाद इस समिति ने केंद्र सरकार को पेश की गई अपनी रिपोर्ट में तेलंगाना राज्य स्थापित न करने की सिफारिश की. इसके बाद क्षेत्र में चल रहा आन्दोलन और भी तेज़ हो गया.
कांग्रेस और केंद्र सरकार की टालमटोल की नीति ने उसे इस क्षेत्र में कितना अलोकप्रिय बना दिया है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि गत तीन वर्षों में वो इस क्षेत्र में कोई उप चुनाव नहीं जीत सकी है.