जाना तो एक दिन सबको है पर इस तरह कोई छोड़ जाए, रूला जाए तो कैसे कोई सहे. कैसे मान लें कि जिस व्यक्ति को देखते देखते टीभी पत्रकारिता सीखे, जिसने सहारा टेलिविजन में नौकरी के लिए मेरा इंटरव्यू लिया वह अब नहीं हैं।
विनोद दुआ इलेक्ट्रानिक मीडिया के पहले पत्रकार थे जो प्रतिष्ठित रामनाथ गोयनका एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म अवार्ड से सम्मानित हुआ। साल 2008 में उन्हें भारत सरकार ने पत्रकारिता के लिए पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया था। मुंबई प्रेस क्लब ने साल 2017 में उन्हें रेडइंक पुरस्कार से सम्मानित किया था। वह 1974 से भारतीय टेलीविजन का चेहरा रहे हैं। विनोद दुआ एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय टेलीविजन के इतिहास में ब्लैक एंड व्हाइट परदे वाले टीवी पर सरकारी नियंत्रित टीवी चैनेल (दूरदर्शन ) पर एंकरिंग करने से लेकर रंगीन एवं स्वतंत्र टीवी चैनेलो की एंकरिंग की और पत्रकारिता के नए प्रतिमान गढ़े।