Quantcast
Channel: पत्रकारिता / जनसंचार
Viewing all articles
Browse latest Browse all 3437

नई दिल्ली स्टेशन-बापू, नेहरू और इरफान / विवेक शुक्ला

$
0
0

 

अगर आपको बदलते हुए भारत को देखना है, तो आप किसी दिन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और फिर इंदिर गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का चक्कर लगा लीजिए। आपको एयरपोर्ट में रेलवे स्टेशन से कहीं अधिक मुसाफिरों की भीड़ और अराजकता नजर आएगी। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का चेहरा-मोहरा बदला-बदला नजर आएगा। दीवारों पर सुंदर पेंटिग्स बन गईं हैं। साफ सफाई बेहतर है। अव्यवस्था बीते सालों-दशकों की बातें लगती है।


अब सन 1926 में बने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को री-डवलप किया जा रहा है। रेलवे ने कुछ दिन पहले टिवटर पर इसकी भावी तस्वीर को शेयर किया। भारत के इस सबसे बिजी और रेलवे के सर्वाधिक कमाऊ स्टेशन से रोज लगभग 400 ट्रेनें चलती और समाप्त होती हैं। यहां पर प्रतिदिन पांच लाख मुसाफिर आते-जाते हैं और इससे हजारों लोगों को रोजगार मिलता है। यहीं से महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू के अस्थि कलश लेकर विशेष रेल गाड़ियां प्रयाग के लिए रवाना हुई थीं।


इधर से ही भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद रिटायर होने के बाद पटना के लिए रवाना हुए थे। उन्हें विदा करने के लिए सैकड़ों लोग मौजूद थे। सबके चेहरे उदास और आंखें नम थीं।


नई दिल्ली रेलवे स्टेशन का अजमेरी गेट वाला भाग सन 1982 में एशियाई खेलों के समय बनाया गया था। उसे बनाने के लिए थामसन रोड की तरफ स्थित एक घने ईसाई कब्रिस्तान को तोड़ा गया था। उसका तब यूज नहीं होता था। उसमें गोरों की कब्रें थीं।


 आमतौर पर माना जाता है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के दो ही गेट हैं- पहाड़गंज की तरफ से या फिर अजमेरी की ओर से। पर इधर पहुंचने का एक रास्ता स्टेट एंट्री रोड से भी है। यह कनॉट प्लेस में प्लाजा से दो-चार मिनट की दूरी पर है। यहां से ही वायसराय और दूसरे आला अंग्रेज अफसर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आया-जाया करते थे। एक दौर था जब इधर से तमाम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी अपने सफर पर निकलते थे।


 पिछले साल तब के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने गृहनगर कानपुर  राजधानी के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से गए थे। यह दिल्ली रिंग रेलवे का एक स्टेशन है। इसमें तीन प्लेटफार्म हैं। इधर सामान्य दिनों में उदासी और सन्नाटा छाई रहती है। पर राष्ट्रपति जी के यहां से सफर करने से इसके भाग्य खुल गए। इसे 1975 में चालू किया गया था। इस लाइन पर चलने वाली गाड़ियां रिंग रोड की तर्ज पर घूमती है। पर यह सेवा दिल्ली में कभी बहुत लोकप्रिय नहीं हुई। दिल्ली रिंग रेलवे का मार्ग 34 किलोमीटर लंबा है।  सन 2010 में आयोजित कॉमनवेल्थ खेलों से पहले रिंग रेलवे के 7 स्टेशनों क्रमश: चाणक्यपुरी, सरोजनी नगर, सेवा नगर, लाजपत नगर, सफदरजंग वगैरह को नए सिरे से तैयार किया गया था। यह समझ नहीं आया था कि राष्ट्रपति को लेकर विशेष रेल गाड़ी सफदरजंग रेलव स्टेशन से ही क्यों चली। क्या वह नई दिल्ली स्टेशन से शुरू नहीं हो सकती थी? 


 खैर, नई दिल्ली रेलव स्टेशन की भीड़ को कम करने के लिए बहुत सी रेलों को आनंद विहार, निजामउद्दीन और अन्य स्टेशनों पर शिफ्ट किया जाता रहा है। पर राजधानी और शताब्दी जैसी खास रेलें 16 प्लेटफार्मों वाले नई दिल्ली स्टेशन से ही चलती हैं। इसका पहली राजधानी एक्सप्रेस से गहरा नाता रहा। पहली बार राजधानी एक्सप्रेस 4 मार्च, 1969 को कोलकाता के हावड़ा स्टेशन से इधर आई थी। यह 3 मार्च, 1969 को हावड़ा स्टेशन से चली थी। अपने पहले सफर में इस ट्रेन ने हावड़ा से दिल्ली तक का 1450 किलोमीटर का सफर 17 घंटे 20 मिनट में पूरा किया था। यह अब 16 घंटे 45 मिनट में सफर तय करती है।


राजधानी एक्सप्रेस जब पहली बार चली थी तब इसमें एक ही दर्जे के एसी कोच होते थे जिसे एसी फर्स्ट कहते हैं। इसके बाद दूसरे दर्जे के वातानुकूलित कोच शामिल किए गए। राजधानी एक्सप्रेस तब से लेकर अब तक नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेट फार्म नंबर एक पर आती हैं। इसे इधर इसलिए लाया जाता है ताकि इसके यात्री चाहे तो स्टेट एंट्री रोड के रास्ते रेलवे स्टेशन पहुंच जाएं। यानी राजधानी एक्सप्रेस में सफर करने वाले मुसाफिरों को सीढ़ियों को चढ़-उतरकर ट्रेन पकड़नी ही ना पड़े।


नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे का ही संसार है। इससे लगभग सटा ही है सन 1954 में बना करनैल सिंह स्टेडियम। इसी स्टेडियम में पान सिंह तोमर ने 1964 में राष्ट्रीय स्टीपलचेज़ स्पर्धा का कीर्तिमान बनाया था। हालांकि उसे हालातों ने बागी बना दिया था और उसने बंदूक उठा ली थी। इसे सन 1978 से पहले पहाड़गंज स्टेडियम कहते थे। बाद में इसका नाम रेलवे बोर्ड के चेयरमेन करनैल सिंह के नाम पर रखा गया। इधर ‘पान सिंह तोमर’ फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले इरफान खान आए थे। वे संभवत: महसूस करना चाहते होंगे कि कैसे पान सिंह तोमर यहां के ट्रेक पर दौड़े होंगे। एक दौर में इससे सटे रेलवे के अफसरों के बंगलों में लाला अमरनाथ भी रहते थे। वे तब यहां पर होने वाले मैचों को देखने के लिए अवश्य पहुंचते थे।


 विवेक शुक्ला, न

नवभारत टाइम्स ( साड्डी दिल्ली) , 8 सितंबर, 2022

फोटो- भविष्य  का नई दिल्ली स्टेशन और आज का स्टेशन.


Viewing all articles
Browse latest Browse all 3437

Trending Articles



<script src="https://jsc.adskeeper.com/r/s/rssing.com.1596347.js" async> </script>