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चंद्रयान-2

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विकिपीडिया

चंद्रयान-२ या चंद्रयान द्वितीयचंद्रयान-1 के बाद चन्द्रमा पर खोजबीन करने वाला दूसरा अभियान है,[7][8][9] जिसे इसरो ने विकसित किया है।[10][11] अभियान को जीएसएलवी मार्क 3 प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित (लॉन्च) किया गया।[12][5] इस अभियान में भारत में निर्मित एक चंद्र ऑरबिटर, एक रोवर एवं एक लैंडर शामिल हैं। इन सब का विकास इसरो द्वारा किया गया है।[13] भारत ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार दोपहर 02:43 बजे सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया।[14]

चंद्रयान-2
चन्द्रयान-द्वितीय (लैण्डर एवं ऑर्बिटर का सम्मिलित रूप)
चन्द्रयान-द्वितीय (लैण्डर एवं ऑर्बिटर का सम्मिलित रूप)
मिशन प्रकारचन्द्र ऑर्बिटर , लैंडर तथा रोवर
संचालक (ऑपरेटर)भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो)
वेबसाइटwww.isro.gov.in/chandrayaan2-home
मिशन अवधिऑर्बिटर: 1 वर्ष
विक्रम लैंडर: <15 दिन[1]
प्रज्ञान रोवर: <15 दिन[1]
अंतरिक्ष यान के गुण
निर्माताभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो)
लॉन्च वजनकुल योग: 3,877 कि॰ग्राम (8,547 पौंड)[2][3]
पेलोड वजनऑरबिटर: 2,379 कि॰ग्राम (5,245 पौंड)[2][3]
विक्रम लैंडर:1,471 कि॰ग्राम (3,243 पौंड)[2][3]
प्रज्ञान रोवर : 27 कि॰ग्राम (60 पौंड)[2][3]
ऊर्जा

ऑरबिटर: 1 किलोवाट[4]विक्रम लैंडर: 650 वाट

प्रज्ञान रोवर: 50 वाट
मिशन का आरंभ
प्रक्षेपण तिथि15 जुलाई 2019, 21:21 यु.टी.सी (योजना) थी, जो तकनीकी गड़बड़ी के चलते 22 जुलाई 2019 को 02:41 अपराह्न की गई थी।
रॉकेटभूस्थिर उपग्रह प्रक्षेपण यान संस्करण 3[5]
प्रक्षेपण स्थलसतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र
ठेकेदारभारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन
चन्द्रमा कक्षीयान
कक्षीय निवेशनसितंबर 6, 2019 (योजना)
कक्षा मापदंड
निकट दूरी बिंदु100 कि॰मी॰ (62 मील)[6]
दूर दूरी बिंदु100 कि॰मी॰ (62 मील)[6]
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भारतीय चन्द्रयान अभियान(इसरो)
← चंद्रयान-1चंद्रयान-3 →

चंद्रयान-2 लैंडर और रोवर को चंद्रमा पर लगभग 70° दक्षिण के अक्षांश पर स्थित दो क्रेटरों मज़िनस सी और सिमपेलियस एन के बीच एक उच्च मैदान पर उतरने का प्रयास करना था। पहियेदार रोवर चंद्र सतह पर चलने और जगह का रासायनिक विश्लेषण करने के लिए बनाया गया था। रोवर द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों को चंद्रयान-2 कक्षयान के माध्यम से पृथ्वी पर भेजने की योजना थी।[15][16]

चंद्रयान-1 ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) 14 नवंबर 2008 को चंद्र सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा पर अपना झंडा लगाने वाला चौथा देश बन गया था।[17] यूएसएसआर, यूएसए और चीन की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद, चंद्रयान-2 लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग हो जाने पर भारत ऐसा करने वाला चौथा देश होता। सफल होने पर, चंद्रयान-2 सबसे दक्षिणी चंद्र लैंडिंग होता, जिसका लक्ष्य 67°-70° दक्षिण अक्षांश पर उतरना था।[18]

हालाँकि, भारतीय समय अनुसार लगभग 1:52 बजे, लैंडर लैंडिंग से लगभग 2.1 किमी की दूरी पर अपने इच्छित पथ से भटक गया[19] और अंतरिक्ष यान के साथ ग्राउन्ड कंट्रोल ने संचार खो दिया।[20]

8 सितंबर 2019 को इसरो द्वारा सूचना दी गई कि ऑर्बिटर द्वारा लिए गए ऊष्माचित्र से विक्रम लैंडर का पता चल गया है। परंतु अभी चंद्रयान-2 से संपर्क नहीं हो पाया है।[21]


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