*कौन थे 'हिन्दुस्तान'में मेरे सहकर्मी ?*
जब मुझे प्रबंधक श्री राम नंदन प्रसाद सिन्हा ने नियुक्ति पत्र दे दिया, तब मैं मुख्य द्वार पर आया। वहां हिन्दुस्तान टाइम्स लि. के ग़ैर पत्रकार कर्मचारियों की कुछ मांगों को लेकर सभा हो रही थी। कुछ भाषण मैंने सुने। फिर मैंने बोलने की अनुमति मांगी। मैंने कहा-"बिड़ला जी मेरे कस्बे के पास के गांव के हैं। हर कम्पनी में लाभ कर्मचारियों की मेहनत से होता है। इसलिए जितना उन्हें संतुष्ट रखा जाएगा, वे अपनी कोशिशें उतनी ही बढ़ा देंगे। सम्पादक दिन भर लोगों को नसीहत देते हैं। उन्हें आपकी मांगों का समर्थन करना चाहिए। पत्रकार स्वयं को श्रमजीवी कहते हैं। उन्हें आपके साथ खड़ा होना चाहिए।"सम्पादकीय विभाग पहली मंजिल पर था, उसकी खिड़कियां खुल गई। श्रोताओं ने पूछा कि "आप किस विभाग में हैं ?"मैंने कहा कि "मैं सम्पादकीय विभाग में आज से ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए ऊपर जा रहा हूं।"इस भाषण के बाद सारे प्रेस कर्मचारियों में मेरे प्रति सम्मान पैदा हो गया। मैं जब भी पेज बनवाने के लिए प्रिंटिंग प्रेस में जाता तो कोई पंखा लेकर हवा करता, कोई पानी लाता, कोई चाय लाता और कोई कुर्सी लाता। मेरा काम फटाफट हो जाता जबकि बाकी को वे काफी देर तक खड़ा रखते थे।
वर्ष 1968 में 'हिन्दुस्तान'के सम्पादक श्री रतनलाल
जोशी थे। वे शायद चूरू (राजस्थान) में पैदा हुए थे। वह स्वतंत्रता सेनानी थे और कई समाचार पत्रों से जुड़े हुए थे। सर्व श्री हरिकृष्ण त्रिवेदी, क्षितीश विद्यालंकार और गोपाल प्रसाद व्यास सहायक सम्पादक थे। श्री चंदू लाल चंद्राकर समाचार ब्यूरो चीफ थे। बाद में वह सम्पादक बन गए। उन्हें गांधी जी की प्रार्थना सभाओं की रिपोर्टिंग करने की विशेष जिम्मेदारी दी गई थी। वह 1 जनवरी 1920 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के निपानी गांव में अन्य पिछड़ा वर्ग में पैदा हुए थे। वह 25 वर्ष की आयु में 'हिन्दुस्तान'में पत्रकार बने। उन्होंने नौ ओलम्पिक खेलों और तीन एशियायी खेलों की रिपोर्टिंग की थी। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री द्वारिका प्रसाद शुक्ल ने उन्हें 1970 में लोकसभा के चुनाव के लिए कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया। वह पांच बार सांसद रहे। उन्हें कृषि, ग्राम विकास, पर्यटन और विमानन मंत्री बनाया गया। उनका 2 फरवरी 1995 को निधन हो गया। श्री यशपाल गुप्त समाचार सम्पादक और श्री विद्यासागर वाशिष्ठ सहायक समाचार सम्पादक थे। सम्पादकीय विभाग में एक वामपंथी (गोरखपुर के श्री विश्वमित्र उपाध्याय) तीन
भाजपा समर्थक और शेष सभी कांग्रेस समर्थक थे। कांग्रेस समर्थकों में श्री शिव कुमार कौशिक मुखर थे। उन्होंने श्रीमती इंदिरा गांधी की जीवनी लिखी। उसे इंदिरा जी को भेंट करने गए तब मुझे भी साथ ले गए थे।श्री केदार नाथ शर्मा दिल्ली नगर निगम सदस्य थे।