015 (15/10/2024)
*मेरे कुछ उल्लेखनीय सहकर्मी-1*
मैंने 'हिन्दुस्तान'में 12 फरवरी 1968 से 11 दिसम्बर 1979 तक (ग्यारह साल दस महीना) काम किया। इस अवधि में कुछ ऐसे पत्रकारों के साथ काम करने का मौका मिला, जिन्होंने पत्रकारिता, साहित्य और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। दो तीन पत्रकारों ने अन्य पत्रकार तथा ग़ैर पत्रकार कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित भाव से काम किया। अब मैं उनकी चर्चा करूंगा।
दैनिक 'हिन्दुस्तान'के सहायक सम्पादक पंडित गोपाल प्रसाद व्यास हास्य व विनोद का कालम "नारद जो खबर लाए हैं'लिखते थे। उनका जन्म मथुरा (उत्तरप्रदेश) के पास महमदपुर गांव में 13 फरवरी 1915 को हुआ था। उनका निधन 90 वर्ष से ऊपर की आयु में 28 मई 2005 को नई दिल्ली में हुआ था। उन्हें वर्ष 1965 में साहित्यिक योगदान के लिए पद्मश्री से अलंकृत किया गया। उनके कई कविता संग्रह- 'मैं क्या करूं?''रस रसामृत''माफ़ कीजिए'और 'बात बात में बात'आदि प्रकाशित हुए थे। उनकी जीवनी 'बहुआयामी जीवन के धनी पंडित गोपाल प्रसाद व्यास' वर्ष 2015 में प्रकाशित हुई थी। उन्होंने नई दिल्ली में 'हिन्दी भवन बनवाया।
"हिन्दुस्तान"में व्यापार डेस्क के प्रभारी स्वर्गीय आनंद राजवंशी कई वर्षों तक दिल्ली पत्रकार संघ
(Delhi Union of Journalists) (कांग्रेसी और वामपंथियों का संगठन) के अध्यक्ष रहे। पत्रकारों की दक्षिण दिल्ली में कालोनी
'गुलमोहर पार्क'बनाने में भी उनकी सक्रिय भूमिका थी। वह मस्तमौला थे। मगर पत्रकारों ने जब जब अपने वेतन बढ़ाने के लिए आंदोलन किऐ तब तब वह आगे की पंक्ति में डटे रहे। वह अजातशत्रु थे। उन्होंने अपने से अलग राय रखने वालों को भी गले लगाया। उनके साथ व्यापार डेस्क पर काम करते थे श्री देवकृष्ण व्यास। वह मध्य प्रदेश के थे। हमेशा खादी के वस्त्रों में रहते थे। उनका विश्वास स्वर्गीय मोरारजी भाई देसाई की तरह मूत्र चिकित्सा में था। वह कम बोलते थे। चुपचाप काम करते रहते थे।
विशेष संवाददाता के रूप में काम करने वाले
श्री आनंद प्रकाश कादम्बिनी के संपादक श्री रामानंद 'दोषी'के छोटे भाई थे। उन्होंने 'राष्ट्रीय पत्रकार निलयम'नामक संस्था बनाई। वह भी अपने ढंग से पत्रकारों को संगठित कर रहे थे।
खेल डेस्क के प्रभारी श्री आनंद दीक्षित की खेलजगत की गतिविधियों पर अच्छी पकड़ थी । वह अकेले ही डेस्क संभाल लेते थे।
प्रूफ रीडरों में श्री ब्रह्मदत्त शुक्ल और श्री नित्यानंद कौशिक की जोड़ी समर्पित भाव से सेवा कर रही थी।दोनों ने बाद में यमुनापार की बस्तियों, में अपने मकान बना लिये।
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016 (16/10/2024)
मेरे उल्लेखनीय सहकर्मी -2
'हिन्दुस्तान के सम्पादकीय विभाग में श्री ओम प्रकाश वैश्य बहुपठित थे। वह गंभीर स्वभाव के थे और हर मुद्दे पर स्पष्ट राय रखते थे । झगड़ा वही शांत करते थे।
पूर्व समाचार सम्पादक स्वर्गीय जगन्नाथ गुप्त ने श्री केदार नाथ शर्मा के साथ मिलकर त्रिनगर नाम की अवैध कालोनी बसा दी थी। आज भी उसमें जगन्नाथ गुप्ता मार्ग है। एक चर्चा थी कि उनके बेटे राजनाथ गुप्त की कई रातें दिल्ली के बदनाम इलाके जी.बी. रोड में किसी वेश्या के कोठे पर ही कटती थीं। वह मुख्य उप सम्पादक था। हर दम मुंह में पान दबाए रखता था मगर ड्यूटी पर आता तो दत्तचित्त होकर काम करता था। किसी से कभी कोई झगड़ा नहीं करता था। कभी देर से नहीं आता था।
एक और मुख्य उपसम्पादक
श्री शिव कुमार कौशिक