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Channel: पत्रकारिता / जनसंचार
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गजल / बिनोद कुमार गौहर

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कौन अपना है या पराया है
बात बांदा समझ ना पाया है।

उनके एहसास व खयालो मे
एक छोटा सा घर बनाया है।

उनके आने की आहटे सुनकर
हमने गलियो मे गुल बिछाया है।

याद रखना मेरे हमदम जानम
साथ हो गर आप तो जमाना है।

जुल्मते तीरगी से निकलो तो
उसने तो दो जहां बनाया है।

बूत परस्ती कहो या जो भी कहो
गौहर तो सजदा मे सर झुकाया है।




प्रस्तुति-- अनिल कुमार चंचल

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