शिमला और हिमाचल प्रदेश के अनेक भागों में भारी बारिश और लैंडस्लाइड से हो रही तबाही की खबरों को पढ़कर कनॉट प्लेस के कई शो-रूमों के बुजुर्ग मालिक मर्माहत है। वे उस दौर को भी याद कर रहे हैं जब कनॉट प्लेस के बहुत सारे शो-रूम शिमला शिफ्ट हो जाया करते थे। तब उनके यहां के शो-रूमों में ताला लग जाता था। तो बहुत साफ है कि कनॉट प्लेस और शिमला का बेहद करीबी रिश्ता रहा। दरअसल कनॉट प्लेस के शुरूआती दौर के शो-रूम मालिकों के शिमला में भी शो-रूम हुआ करते थे। नाम भी एक जैसे।
उदाहरण के रूप में गेंदामल हेमराज डिपार्टमेंटल स्टोर, किंसे ब्रदर्स, शिमला स्टुडियो, दीवान चंद ड्रेपर्स वगैरह। किंसे ब्रदर्स और शिमला स्टुडियो फोटो स्टुडियो हुआ करते थे। आपको दिल्ली में अब भी तमाम घरों के एलबम में इनकी खींची हुई फोटो मिल जाएंगी। गेंदामल हेमराज डिपार्टमेंटल स्टोर रीगल बिल्डिंग में हुआ करता था।
कनॉट प्लेस और शिमला के बीच में संबंध इसलिए बन गये थे क्योंकि दिल्ली में सरकारी दफ्तर अप्रैल से अक्तूबर तक बंद रहते थे या कहें कि शिफ्ट होकर शिमला चले जाते थे। कनॉट प्लेस में शॉपिंग के लिए गोरे और दूसरे ऊंचे ओहदों पर बैठे सरकारी नौकरी करने वाले हिन्दुस्तानी ही आते थे। ये सब गर्मियों में शिमला शिफ्ट हो जाते थे। मतलब गर्मियों में कनॉट प्लेस सुनसान हो जाता था। ये बातें सन 1933 से सन 1946 तक की है। हालांकि देश की आजादी के बाद भारत सरकार के सभी दफ्तर स्थायी रूप से दिल्ली से ही काम करने लगे तो कनॉट प्लेस के दुकानदारों का भी कुछ महीनों तक शिमला में शिफ्ट होना बंद हो गया।
कनॉट प्लेस के शो-रूम ही शिमला नहीं शिफ्ट होते थे। कनॉट प्लेस से सटा राजा बाजार का यूनियन एकाडमी स्कूल और मंदिर मार्ग का हरकोर्ट बटलर स्कूल भी गर्मियों में शिमला चले जाते थे। इनमें अधिकतर सरकारी मुलाजिमों के ही बच्चे पढ़ा करते थे, इसलिए इनके स्कूल शिमला में शिफ्ट कर दिये जाते थे। इनके अध्यापक और दूसरा स्टाफ भी शिमला जाते थे। हरकोर्ट बटलर स्कूल के कुछ पुराने छात्र बताते हैं कि जब वे 1960 के दशक में हरकोर्ट बटलर स्कूल में पढ़ रहे थे तब उनके कई अध्यापक उन दिनों की बातें करते थे जब उनका स्कूल कुछ महीनों के लिए दिल्ली से शिमला चला जाता था।
हरकोर्ट बटलर स्कूल नई दिल्ली का पहला सरकारी स्कूल माना जाता है। ये सन 1917 में बन गया था। इधर सन उर्दू और फारसी भी पढ़ाई जाती थी। पर 1947 में देश के विभाजन का इस पर गहरा असर हुआ। यहां के दर्जनों बच्चे और कुछ अध्यापक पाकिस्तान चले गए। बदले में आने लगे रेफ्य़ूजी परिवारों के बच्चे। उर्दू और फारसी पढ़ने-पढ़ाने की सुविधा खत्म हो गई।
इसमें कनॉट प्लेस के बाबा खड़क सिंह मार्ग ( पहले इरविन रोड) और कनॉट प्लेस में रहने वाले परिवारों के बच्चे खासी तादाद में पढ़ा करते थे। उधर, यूनियन एकाडमी को दिल्ली के बंग समाज का स्कूल माना जाता रहा है। यूनियन एकाडमी शिमला से 1939 में दिल्ली में शिफ्ट हुआ था। शिमला में इसका नाम बंगाली ब्याज स्कूल था। वहां इसे प्रवासी बंग समाज ने शुरू किया था। दिल्ली आने के बाद भी गर्मियों में यह शिमला शिफ्ट हो जाता था। इसकी राजा बाजार वाली बिल्डिंग का निर्माण दिल्ली के मशहूर ठेकेदार सरदार सोबा सिंह ने करवाया था।