चंद्रयान-3 ने चंद्रमा पर समय से सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर भारत के लिए एक स्वर्णिम इतिहास रच दिया है । अब भारत, रूस,,अमेरिका और चीन के बाद चंद्रमा पर सफलतापूर्वक यान उतारने वाला चौथा देश बन चुका है। इसरो के वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया है कि भारत विश्व गुरु बनने की स्थिति में आ चुका है। चंद्रयान 3 के शॉफ्ट लैंडिंग होते ही संपूर्ण देश में पटाखे फूटने लगे । लोग रास्तों पर निकाल कर, हाथों में तिरंगा लिए नाचने गाने लगे । हर ओर खुशियां ही खुशियां देखने को मिल रही है। देश भर के छात्र गण एवं आम जन सुबह से ही चंद्रयान के सॉफ्ट लैन्डिंग का इंतजार कर रहे थे । सबकी निगाहें चंद्रयान की सौफ्ट लैंडिंग पर टिकी हुई थी। जैसे ही टेलीविजन पर चंद्रयान के सफल सौफ्ट लैंडिंग का समाचार आया, सब के सब गले मिलकर एक दूसरे को बधाई देने लगे। भारत में रहने वाले विभिन्न धर्म पंथ, विचार के लोग सुबह से ही चंद्रयान की सफल लैंडिंग की कामना कर रहे थे। आज उनकी कामना पूर्ण हो गई। भारत पूरब से पश्चिम उत्तर से दक्षिण तक आज एक दिख रहा है। चंद्रयान की सफल लैंडिंग ने संपूर्ण भारतवासियों को एक सूत्र में बांध दिया है। आज एक-एक भारतवासी गर्व महसूस कर रहे है।
आज भारत का मून मिशन यानी कि ‘चंद्रयान 3’ चांद की सतह पर पूरी सफलता के साथ सॉफ्ट लैंडिंग कर दिया है। इसके साथ ही चंद्रमा के साउथ पोल पर पहुंचने वाला भारत, विश्व का पहला देश बन चुका है। इसरो ने मात्र 650 करोड रुपए में चंद्रयान को तैयार किया था। इतनी राशि में बड़े बजट की एक फिल्म भी नहीं बन पाती है । चंद्रयान -2 की असफलता के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने जो संकल्प लिया था, आज चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग से पूरा हो गया। आपको बता दूं कि चंद्रयान-3 का लैंडर-रोवर चंद्रमा पर सिर्फ एक दिन में ही अपना काम करना शुरू कर देगा। चांद का एक दिन, पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होता है। भारत के इसरो के इस महत्वाकांक्षी मिशन से देशभर की उम्मीदें जुड़ी हुई थी। चंद्रयान-3 ने पूरे देश को एक बार फिर से एक कर दिया है। चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग के लिए लोग मंदिरों सहित विभिन्न इबादत गाहों में जाकर प्रार्थना कर रहे थे । आज चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के बाद लोग बड़े ही श्रद्धा के साथ अपने-अपने इबादत गाहों में प्रार्थना करते दिख रहे हैं। निश्चित तौर पर यह समाचार संपूर्ण भारतवासियों के लिए गौरवान्वित करने वाला है।
देश का चंद्रमा मिशन यानी ‘चंद्रयान-3’ को चंद्रयान -2 का फॉलोअप मिशन था । चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराना इसका मुख्य उद्देश्य था । इसरो के वैज्ञानिकों को अपने शोध और अपनी मेहनत पर भरोसा था कि इस बार चंद्रयान 3 पूरी तरह सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफल होगा । इसके बावजूद कहीं न कहीं शंका उनके मन में भी थी। चूंकि तीन दिन पूर्व ही रूस का लूना 25 चंद्रमा पर लैंडिंग करने से पूर्व ही क्रैश कर गया था। इस क्रैश के समाचार के बावजूद हमारे इसरो के वैज्ञानिक पुरी तन्मयता के साथ चंद्रयान 3 के चाल पर पूरी गहराई के साथ ध्यान रखे हुए थे।
इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान 3 के सफल लैंडिंग पर किसी भी तरह का कोई रिस्क लेना नहीं चाहते थे। इसलिए अपने अपने मॉनिटर पर दिन रात सैकड़ो वैज्ञानिक लगे हुए थे। इसका प्रतिफल यह हुआ कि चंद्रयान पूरी तरह सफलता के साथ चंद्रमा पर अपना दस्तक दे दिया। करीब चार साल बाद एक बार फिर से इसरो चंद्रयान-3 के माध्यम से चांद पर लैंडर और रोवर को दक्षिणी ध्रुव में सौफ्ट लैंडिंग कर कीर्तिमान स्थापित कर दिया है । इससे पहले 2019 में चंद्रयान - 2 लॉन्च किया गया था। उस वक्त चांद पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की हार्ड लैंडिंग हो गई थी। इसके ठीक तीन महीने बाद ही अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसका मलबा भी ढूंढ लिया था।
यह देशवासियों को जानना चाहिए कि मून मिशन ‘चंद्रयान-3’ देश का तीसरा मिशन था , जिसे 14 जुलाई 2023 को लॉन्च किया गया था। दक्षिण भारत आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से चंद्रयान-3 को छोड़ा गया था। अब यह करीब 40 दिन बाद लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) आज यानी 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक लैंड कर लिया है । ‘चंद्रयान-3’ को भेजने के लिए एल भी एम -3 लॉन्चर का इस्तेमाल किया गया था।
चंद्रयान-3 पृथ्वी से निकलने के बाद अपने 40 दिनों की यात्रा के बाद आज चांद पर पहुंचा। 14 जुलाई को चंद्रयान-3 को लॉन्च किया गया था। वहीं आज यानी 23 अगस्त को मून मिशन ‘चंद्रयान-3’ चंद्रमा की सतह पर सफल लैंडिंग से यह मिशन पूरा हुआ। हालांकि देशवासियों के दिमाग में कई सवाल आ रहे होंगे कि आखिर 23 अगस्त को चंद्रयान 3 लैंडिंग क्यों हो रही है ? इस उठते सवाल का जवाब है, चंद्रमा में 14 दिन तक दिन (सूरज की रौशनी पड़ती है) और उसके अगले 14 दिन रात रहती है। और अब इस वक्त वहां रात है। वहीं सभी चीजों की गणना करने के बाद इसरो इस नतीजे पर पहुंचा है कि 23 अगस्त से चांद पर दिन होने वाला है। यानी अगले 14 दिन चांद पर सूरज निकलेगा। इस प्रकार जब चंद्रयान की लैंडिंग होगी, तब उस वक्त तब दक्षिणी ध्रुव पर सूरज की रोशनी उपलब्ध रहेगी। चंद्रयान-3 का लैंडर और रोवर चांद की सतह पर उतरने के बाद अपने मिशन का अंजाम देने के लिए सौर ऊर्जा का इस्तेमाल करेगा। 23 अगस्त से 5 सितंबर के बीच दक्षिणी ध्रुव पर धूप निकलेगी, जिसकी मदद से चंद्रयान का रोवर चार्ज हो सकेगा और अपने मिशन को अंजाम देगा।
चंद्रयान 3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग ने एक कृतिमान गढ़ दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर इसरो के वैज्ञानिकों को सलाम किया है। उन्होंने इस सफलता के लिए इसरो के वैज्ञानिक को सहित देशवासियों को भी बधाई दिया है। वहीं देश की महामहीम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने भी इसरो को वैज्ञानिक को सहित देशवासियों को इस सफलता के लिए बधाई दिया है। निश्चित तौर पर यह दिन भारतवासियों के लिए एक स्वर्णिम दिन के रूप में याद किया जाएगा।
विजय केसरी,
(कथाकार/ स्तंभकार) .
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