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पंजाबी कहानी / अंधी गली का मोड़




कहानी '- अंधी गली का मोड़....

कथाकार  Gurdial Dalal जी की पंजाबी कहानी।

"बाहर मौसम बदल गया था। बादलों की घटा चढ़ी आ रही थी और साथ ही ठंडी ठंडी हवा। फिर सोचा, मैं भी कैसी माँ हूँ,जवान पुत्र मरा है, इतनी शांत हुई खड़ी हूँ, मैंने दोनों हाथ ऊपर उठाए और बड़ी जोर से अपनी जांघों पर दे मारे, मेरा विलाप सारी गली में गूंज गया......"

(यह कहानी मैंने मार्च 2018 में पढ़ी थी। बहुत प्रभावित और विस्मित करती गुरदयाल दलाल की यह पंजाबी कहानी जिसका हिंदी अनुवाद Subhash Neerav  सर ने किया था। तब की पढ़ी कहानी पर आज दुबारा लिखने का कारण है कि एक अद्भुत या कहूँ कालजई कहानी जिसको लगातार चर्चा के केंद्र में होना था, उस तरह चर्चा क्यो नहीं हुई ? अश्लीलता का झूठा आरोप आदि कुछ बातें जिनके कारण एक पाठक होने के कारण मुझे भी पीड़ा हुई थी। इसी कारण आज यह टीप)

      इसमे कोई दो राय नहीं है कि जो व्यक्ति  पूरी तरह लोक का उत्पाद या लोक से बहुत गहरे जुड़े होते हैं वे भवनात्मक स्तर पर भावुकता की हद से ज्यादा भावुक और संवेदनशील लेखक होते हैं जब इस समाज मे बढ़ रहे नशे और व्यसन और धीरे धीरे समाप्त होती जा रही जवानी के भटकाव और कुकर्मो पर लिखता है तो उसके सरोकार बहुत गहरे होकर इस मानवीय टीस को छूकर 'अंधी गली का मोड़'को रचती है। उनकी कलम शब्द के साथ पूरा न्याय करती है। लेखक इस कहानी में जिस तरह पैनी नजरों से समाज और समय और संबंध की भीतरी तहों में उतरता है उसे देखकर आश्वस्त हुआ जा सकता है कि लेखक समाज का साहित्यिक पोस्टमार्टम करने में सक्षम है। गुरदयाल दलाल की यह कहानी बहुत पहले, छपते ही पढ़ ली थी। इसमे कोई दो राय नहीं कि मूल रचना को जस की तस अनुवाद कर देना भी बड़ा काम है जो सुभाष नीरव ने किया है। कहानीकार जिस अनुभवी व्यक्ति की तरह मानवीय संबंधो और प्रवृतियों का ऑपरेशन करते हुए वर्णन करता है और उसकी सूक्ष्म मूल्यांकन और निरीक्षण शक्ति इन्हें पंजाब और पंजाबी के दायरे से निकालकर भारतीय भाषाओं के लेखकों में स्थापित करती है।
     अश्लीलता के झूठे आरोप झेलते हुए शायद गुरदयाल दलाल भी निराश हों लेकिन एक पाठक की नजर से देखा जाए तो यहां अश्लीलता का एक प्रतिशत भी नहीं है।
     गुरदयाल दलाल मध्यम वर्गीय  लोगों के जीवन संघर्ष, पीड़ाओं और आदतों के चितेरे हैं।  यह भावुकता के अतिरेक ने लिखी गयी कहानीं नहीं हैं । वे यथार्थ को भवुक मगर कठोरता से परोसते हैं। और मानसिक द्वंद्व और सामाजिक परिस्थितियों का विवरण प्रस्तुत करता है। यहां यह कहानी नशे से मरते हुए युवा के हैवान बन जाने और एक माँ के संघर्ष और मजबूरी के प्रति पाठकों में दया भाव पैदा करने में सफल रहती है।

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