तकनीकी बदलाव के साथ चले मीडिया
संगोष्ठी के समापन पर वक्ताओं ने रखी अपनी राय
: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग
की ओर से ‘आध्यात्मिकता, मीडिया और सामाजिक बदलाव’ विषय पर 18, 19 एवं 20 जनवरी को
आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय मीडिया संगोष्ठी का समापन बुधवार को माधवराव सप्रे सभामंडप
में किया गया। समापन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के अतिथि लेखक प्रो. अजित दलाल ने
की। इस अवसर पर मंच पर इग्नू के जनसंचार विभाग के निदेशक शंभू नाथ सिंह, वरिष्ठ पत्रकार
अरविंद मोहन, गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विवि के संचार एवं पत्रकारिता अध्ययन केंद्र के निदेशक
प्रो. सी. पी. सिंह उपस्थित थे।
प्रो. अजित दलाल ने महात्मा गांधी की पत्रकारिता का उल्लेख करते हुए कहा पत्रकारिता और
आध्यात्मिकता दोनों एक दूसरे से जुड़े हुए है। गांधी जी ने इसका उदाहरण अपनी पत्रकारिता और
आचरण से दिया। उन्होंने आशा जतायी कि गांधी जी की कर्मभूमि में यह आयोजन संचार माध्यमों
में नए परिवर्तन लाने का काम करेगा।
वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने कहा कि तकनीक ने दुनिया ही बदल दी है। परंतु इस बदलाव को
लेकर सच्चाई के साथ पत्रकारिता होनी चाहिए। बदलाव को देखना, समझना और इसके अनुसार
चलना ही पत्रकारिता है। डॉ. शंभूनाथ सिंह ने कहा कि मीडिया की आलोचना पहले से ही होते आ
रही है। उसे इसका पूराना अभ्यास है। तकनीक और मीडिया के अंतर्संबंधों का जिक्र करते हुए
उन्होंने कहा कि विश्वग्राम की सभ्यता के अभी केवल निशान भर दिख रहे हैं। इसके परिणाम
आने वाले दिनों में दिखाई देंगे। समापन सत्र का स्वागत वक्तव्य संगोष्ठी के निदेशक, विवि के
जनसंचार विभाग के प्रो. अनिल कुमार राय ने दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, मीडिया और
सामाजिक बदलाव’ विषय पर यह दूसरी राष्ट्रीय संगोष्ठी है और इसका सफल आयोजन मीडिया के
विद्वानों, शोधार्थियों के लिए उत्साह भरने का काम करेगा। उन्होंने संगोष्ठी में आए सभी
अतिथियों तथा प्रतिनिधियों का आभार जताया। सत्र का संचालन संगोष्ठी के संयोजक, जनसंचार
विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अख्तर आलम ने किया।