ग्रामीण और शहरी पहचान का भेद
महान रसियन कथाकार और फिल्मकार वसीली शुक्सिन ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके जीवन की एक अजीब विडंबना है कि वे शहरियों के बीच में ग्रामीण और ग्रामीणों के बीच शहरी लगते हैं,इसे इस तरह समझे कि वे जब...
View Articleलालाजी का निवाला / अखिलेश श्रीवास्तव
कायस्थों का खाना-पीना – कड़ी नंबर 1 --बनारस के अर्दली बाजार में काफी बड़ी संख्या में कायस्थ रहते हैं. अगर आप रविवार को यहां के मोहल्लों से दोपहर में निकलें तो हर घर के बाहर आती खाने की गंघ बता देगी कि...
View Articleकोरोनाः से बचने के लिए जरूरी
अति आवश्यक सूचना*अस्पताल से ठीक हो चुके मरीजों से प्राप्त जानकारी के अनुसार:--* हर दिन उन्हें दिया जाता था 1. विट सी -1000 2. विटामिन ई 3. 15-20 मिनट के लिए दिन में ग्यारह बजे धूप में बैठना।...
View Articleमौत से ज्यादा क्या है............
रामावतार त्यागीरामावतार त्यागी पर जितना जानने का प्रयास किया जाए उतना कम ही है। उनका एक प्रसिद्ध गीत है -एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले।मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले।।जिंदगी और बता तेरा...
View Articleदिनेश श्रीवास्तव की कविताएं
दिनेश श्रीवास्तव: दिनेश कुण्डलिया------------------------- विषय- "योद्धा'' (१)कहलाता योद्धा वही,तरकस में हों तीर।धीर वीर गंभीर हो,जैसे थे रघुबीर।।जैसे थे रघुबीर,राक्षसी...
View Articleएक दुर्लभ ग्रंथ
*अति दुर्लभ एक ग्रंथ ऐसा भी है हमारे सनातन धर्म मे*इसे तो सात आश्चर्यों में से पहला आश्चर्य माना जाना चाहिए ---*यह है दक्षिण भारत का एक ग्रन्थ*क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के...
View Article😉😀 यह उन दिनों की बात है! 😋😐😶😀😉
समय...स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं विद्यामाता नाराज न हो जायें ।पढ़ाई का तनाव हमने पेन्सिल का पिछला हिस्सा चबाकर मिटाया था ।स्कूल में टाट...
View Articleकहीं से भी पुकार सकता है रावण / रवि अरोड़ा
😀😐😶😋😚😗😊😊😕कहीं से भी पुकार सकता है रावणरवि अरोड़ालीजिए रावण का वध हो गया । ख़ुशी का ही तो अवसर है कि रावण मारा गया । आज के उस दौर में जब रावण मारे नहीं जाते वरन ऊँचे और ऊँचे होते जाते हैं वहाँ टेलीविजन...
View Articleतू भी टची मैं भी टची / रवि अरोड़ा
रवि अरोड़ाकहते हैं कि मज़ाक़ तीन तरह का होता है । पहला अपना मज़ाक़ उड़ाना, दूसरा सामने वाले का और तीसरा होता है परिस्थिति का मज़ाक़ अथवा परिस्थितिजन्य हास्य । तमाम हास्य फ़िल्मों और कोमेडी शो के बावजूद...
View Articleकबीर की पगड़ी
*💐👳🏼♀कबीर जी की पगड़ी👳🏼♀💐💐* *एक बार संत कबीर ने बड़ी कुशलता से पगड़ी बनाई। झीना- झीना कपडा बुना और उसे गोलाई में लपेटा। हो गई पगड़ी तैयार। वह पगड़ी जिसे हर कोई बड़ी शान से अपने सिर सजाता हैं।...
View Articleकोरोना फैक्ट्री बन गया है आगरा
वुहान बनता आगरा-----------------------------जब नासमझ अफसरों के हाथ में आगरा जैसे शहर की कमान सौंप दी जाएगी तो आगरा को बुहान बनने से हुकूमत को क्या ईश्वर भी नहीं रोक सकता। यकीनन कोरोना संक्रमण की जैसी...
View Articleकोरोना फैक्ट्री बन गया है आगरा
वुहान बनता आगरा-----------------------------जब नासमझ अफसरों के हाथ में आगरा जैसे शहर की कमान सौंप दी जाएगी तो आगरा को बुहान बनने से हुकूमत को क्या ईश्वर भी नहीं रोक सकता। यकीनन कोरोना संक्रमण की जैसी...
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वुहान बनता आगरा-----------------------------जब नासमझ अफसरों के हाथ में आगरा जैसे शहर की कमान सौंप दी जाएगी तो आगरा को बुहान बनने से हुकूमत को क्या ईश्वर भी नहीं रोक सकता। यकीनन कोरोना संक्रमण की जैसी...
View Articleधीरे धीरे खत्म होते अखबार / रवि अरोरा
क़त्ल होते अख़बाररवि अरोड़ावर्ष 1990 में मैंने अपना एक अख़बार निकाला । नाम था दैनिक जन समावेश । ख़बरों के लिहाज़ से बहुत अच्छा चल रहा था मगर विज्ञापनों का मामला ठन ठन गोपाल ही रहा । लगभग ढाई साल इस...
View Articleकोरोनाय स्वाहा... / कवि अनाम
*चौपाई:-**हे जिनपिंग! चीन के स्वामी।**तुम तो निकले बड़े हरामी।।1।।**कोरोना के पालन कर्ता।**मिल जाओ तो बना दें भरता।।2।।**कोई मुल्क नहीं है बाकी।**जहां ना मिलती इसकी झांकी।।3।।**लॉक हुए हैं घर मे...
View Articleसहजीवन की दस्तक /आलोक यात्री
📎 📎 आभार / साभारदैनिक जनसत्ता, नई दिल्ली(मित्रों की सुविधा के लिए मूल आलेख भी संलग्न)सहजीवन की दस्तकखबर दुखद है या सुखद, यह आप लोगों को तय करना है। लेकिन खबर दिलचस्प है। इन दिनों सोशल एनिमल कहा जाने...
View Articleआगरा में कोरोना और राधास्वामी संतमत दयालबाग
*Coronavirus in Agra:* *पढ़िए अंदर की बात :*- (वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र पटेल की फेसबुक वॉल से साभार)*Agra (Uttar Pradesh, India)।* जब नासमझ अफसरों के हाथ में आगरा जैसे शहर की कमान सौंप दी...
View Articleबचपन की बात है / गीताश्री
बचपन की बात है .गीताश्रीस्कूली दिनों की. सरकारी स्कूल में पढ़ती रही. एक नहीं कई शहरों, क़स्बों के कई स्कूल में. बाबूजी का तबादला होता रहता, हम हर दो साल पर ट्रक पर लदे फदे दूसरी जगह पहुँच जाते. अनुभव...
View Articleरवि अरोड़ा की दो रचनाएं
इस कालम का कोई नाम होना चाहिए।: हे ईश्वर अब तू ही इन्हें समझारवि अरोड़ाअब इसे आप संस्कार कहें अथवा परिवार का माहौल मगर यह सत्य है कि देश के अधिकांश धार्मिक स्थल पर मैं माथा टेक आया हूँ । इस मामले में...
View Articleदिनेश श्रीवास्तव की कुण्डलियां
विषय- "वाणी" (१)वाणी ऐसी बोलिए, प्रथम कीजिए तोल।शब्द शब्द हो संयमित,फिर मुख निकले बोल।।फिर मुख निकले बोल, सदा सुखदायी होता।मन का अंतर खोल,अन्यथा मानव रोता।।कहता सत्य...
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