BMM Syllabus - Mumbai University Course
Bachelors in Mass Media (BMM) Notes & SyllabusContentsBMM Syllabus (2) First Year Syllabus (1) Journalism (2) Magazine Journalism (1) Niche Journalism (2) Online Journalism (1) Second Year Syllabus...
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Bachelors in Mass Media (BMM) Notes & SyllabusContentsBMM Syllabus (2) First Year Syllabus (1) Journalism (2) Magazine Journalism (1) Niche Journalism (2) Online Journalism (1) Second Year Syllabus...
View ArticleJournalism as a craft, a profession
School of DistanceEducation History ofJournalism5Unit-I INTRODUCTIONORIGIN OF JOURNALISM Journalism as a craft, a profession and even as a trade or business, is over two centuries old.It was made...
View Articleखोजी पत्रकारिता पर एक नजरिया
-सुग्रोवर||दूर के ढोल सुहावने होने ‘की कहावत खोजी पत्रकारिता पर सोलहों आने लागू होती है. यदि आप सत्ताधीशों से मेलजोल रखना चाहते हैं, “पेज थ्री” पार्टियों में आमंत्रित होना चाहते हैं, तबादलों,...
View Articleमेरठ का प्रकाशन उद्योग
http://hi.wikipedia.org/s/1ccqमुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया सेइस लेख में सन्दर्भया सूत्रनहीं दिए गए हैं।कृपया विश्वसनीय सूत्रों के सन्दर्भ जोड़कर इस लेख में सुधार करें। बिना सूत्रों की सामग्री को हटाया जा...
View Articleगणेश शंकर विद्यार्थी: एक क्रांतिकारी पत्रकार / अंकुर विजयवर्गीय
अंकुर विजयवर्गीय •/ 25.10.2013जन्मदिवस 26 अक्टूबर पर विशेष लेख) अपनी बेबाकी और अलग अंदाज से दूसरों के मुंह पर ताला लगाना एक बेहद मुश्किल काम होता है। कलम की ताकत हमेशा से ही तलवार से अधिक रही है और...
View Articleवर्तमान मीडिया … झूठ का फैलता व्यापार / श्याम नारायण रंगा
by श्याम नारायण रंगा • March 25, 2014 •-श्याम नारायण रंगा ‘अभिमन्यु’- बात तब की है तब में एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज चैनल के लिए अपने जिले का प्रतिनिधि संवाददाता हुआ करता था। सर्दी के मौसम में मेरे...
View Articleहरिजन
http://hi.wikipedia.org/s/1927मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया सेहरिजनसमाचार-पत्रहरि का अर्थ है "ईश्वर या भगवान"और जन का अर्थ है "लोग"महात्मा गाँधीने "हरिजन"शब्द का प्रयोग हिन्दू समाज के उन समुदायों के...
View Article‘हरिजन’ का फैसिमाइल संस्करण होगा जारी
बापू के साप्ताहिक ‘हरिजन’ का फैसिमाइल संस्करण होगा जारीराष्ट्रपिता महात्मा गांधी (फाइल फोटो)राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने जिस साप्ताहिक ‘हरिजन’ की शुरूआत की थी उसका फैसिमाइल संस्करण जारी किया जाएगा. उस...
View Articleमिशन, प्रोफेशन और कमर्शियलाइजेशन...के बाद ...???
‘‘एक समय आएगा, जब हिंदी पत्र रोटरी पर छपेंगे, संपादकों को ऊंची तनख्वाहें मिलेंगी, सब कुछ होगा किन्तु उनकी आत्मा मर जाएगी, सम्पादक, सम्पादक न होकर मालिक का नौकर होगा।’’ स्वतंत्रता आंदोलन को अपनी कलम के...
View Articleसामाजिक आंदोलन और न्यू मीडिया
August 17, 2011समाचार पत्रों और चैनलों में व्यावसायीकरण के प्रभाव के कारण निष्पक्ष विचारों का प्रभाव बहुत कम होता जा रहा है। निष्पक्ष विचार रखने वालों को मीडिया जगत में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता...
View Articleधर्मयुग की पत्रकारिता से संवाद लेखन में मुड़ गया-संजय मासूम
October 16, 2013-अजय ब्रह्मात्मज संजय मासूम ने पहली फिल्म 'जोर'से ही जोरदार दस्तक दी। उनकी अगली फिल्म 'कृष 3'नवंबर में आ रही है। संजय ने यहां संवाद लेखन के प्रति अपने झुकाव,चुनौती और स्थिति की...
View Articleक्या पत्रकारिता के सिद्धांतों का कोई भविष्य है…..?
राकेश रंजन कुमारपत्रकारिता में एथिक्स को लेकर लंबी बहस रही है। क्योंकि पत्रकारिता औऱ एथिक्स का चोली-दामन का संबंध रहा है । ऐसे में जैसे-जैसे पत्रकारिता बदली है उसके एथिक्स में भी बदलाव देखने को मिला...
View Articleवर्तमान मीडिया … झूठ का व्यापार
श्याम नारायण रंगा • March 25, 2014 •-श्याम नारायण रंगा ‘बात तब की है तब में एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूज चैनल के लिए अपने जिले का प्रतिनिधि संवाददाता हुआ करता था। सर्दी के मौसम में मेरे पास उक्त चैनल के...
View Articleमीडिया के लिए आचार संहिता क्यों नहीं ?/ अरविंद कुमार सिंह-
मीडिया के लिए आचार संहिता क्यों नहीं बने?अरविंद कुमार सिंहनई दिल्ली।हाल के सालों में मीडिया में कई बड़े परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। देश के हर हिस्से में टेलीविजन पहुंच गया है और मनोरंजन के साथ...
View Articleअरविन्द कुमार सिंह A 2 Z
अरविन्द कुमार सिंहhttp://hi.wikipedia.org/s/zlrमुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया सेनाम अरविंद कुमार सिंह लेखन तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में 600 से अधिक...
View Articleटीवी की कलम विहिन पत्रकारिता व मातृ भाषा
Tech Vyom: अनिल कुमार बैनिवालगावों से लेकर शहरों तक, झोपड़ियों से लेकर राजमहलों तक तथा धरती से लेकर अंतरिक्ष तक सूचना ने नई तकनिकों के सहारे हर जगह अपने पांव फैला दिए है । सूचना तकनिकी के क्षेत्र मे...
View Articleसाहित्यिक पत्रकारिता
साहित्यिक पत्रकारिता मनोज कुमार श्रीवास्तव द्(भारत भवन, भोपाल में लघु पत्रिकाओं से सम्बन्धित तीन दिवसीय परिसंवाद (12, 13 और 14 जून 2009) में संस्कृति सचिव मनोज कुमार श्रीवास्तव द्वारा दिये गये स्वागत...
View Articleबदलते स्वरूप में सिनेमा व उसकी पत्रकारिता
सामाजिक घटनाक्रमों के यथार्थ स्वरूप को चलचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करने की विधा सिनेमा है। समय के साथ-साथ इसके स्वरूप में भी परिवर्तन होते रहे हैं। कल तक जो सिनेमा पारिवारिक विघटन, भूख, गरीबी,...
View Articleबाल पत्रकारिता
http://hi.wikipedia.org/s/a8gमुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया सेबाल पत्रकारिताकी सुदीर्घ परम्परा को एक आलेख में समेटना निश्चय ही अंजलि में समुद्र भर लेने के समान है। बाल साहित्य की अनेक पत्रिकाएँ विगत पचास...
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