एडवरटाईजमेंट की तिलिस्मी दुनियां
१९७० में हम उदयपुर में रहते थे. राजेंद्र कुमार और आशापारिख की नाइट होने वाली थी. फिल्म स्टारों का उन दिनों आज से भी ज्यादा क्रेज था. हम भी देखने गए. प्रवेश की शर्त क्या थी सुनकर आप को आश्चर्य होगा....
View Articleकोरोनाः अब गांव की बारी / काली शंकर उपाध्याय
*काली शंकर उपाध्याय*Covid-19 कोरोनावायरस स्पेशल**अब गांव की बारी**एक तरफ पूरा विश्व को रोना जैसी वैश्विक महामारी से परेशान है तो दूसरी तरफ भारत भी इस लड़ाई में किसी से कम नहीं इस लड़ाई में भारत में...
View Articleजर्मनी की चुनावी यात्रा / त्रिलोकदीप
पश्चिम जर्मनी की राजधानी बोन में चुनावी प्रेस कांफ्रेंस के बाद एक जर्मन पत्रकार से बातचीत बहुत उपयोगी रही। वह भारत रह चुका था और हमारे यहां के लोकसभा चुनाव कवर भी कर चुका था। दोनों देशों के बीच की...
View ArticleAJIT jogi.ki yaad me / shishir soni
तब अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे। मैं दैनिक भास्कर दिल्ली में विशेष संवाददाता था। मैंने एक खबर लिखी, "सीबीआई ने चार्जसीट किया तो जोगी का जाना तय..."खबर रायपुर लैंड करते ही मेरा मोबाइल बजा। शिशिर जी नमस्कार,...
View Articleयुगोस्लोवाकिया यात्रा की यादें / त्रिलोकदीप
बात 17 सिंतबर, 1977 की है। सोवियत संघ की यात्रा समाप्त कर अगला ठौर युगोस्लाविया था। सुबह सवेरे बारिश के बीच मॉस्को के अपने होटल से साढ़े पांच बजे निकल गया। एयरपोर्ट डेढ़ घंटा पहले पहुंचना था। वक़्त से...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर से
कुछ कहता है अब्दुल बिगाड़ूरवि अरोड़ाकिसी गाँव में अब्दुल नाम एक आदमी रहता था जिसका प्रिय शग़ल था लोगों के काम बिगाड़ना । उसके बारे में मशहूर था कि वो किसी को खाता-कमाता नहीं देख सकता । नतीजा गाँव में...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर से
लाला रामदेव की नीम हकीमीरवि अरोड़ाऋषिकेश में एक नीम हकीम है नीरज गुप्ता । कई दशकों से उसने मिर्गी के शर्तिया आयुर्वेदिक इलाज के नाम पर ऊधम मचा रहा है और अब तक करोड़ों रुपये भी कमा चुका है । अख़बारों...
View Articleकिताबों की खिली खिली खुली दुनियां / चण्डीदत्त शुक्ला
आवरण कथामुंगेर, पटना, बक्सर, रोहतास और गया के साथ प्रदेश के कुल 534 प्रखंड मुख्यालय रेड ज़ोन में हैं, ऐसे में पढ़ने के शौकीन किताबों तक कैसे पहुंचें - ये बड़ा सवाल है।हालांकि लॉकडाउन के दौरान अध्ययनशील...
View Articleकोरोना संकट जुलाई के बाद क्या होगा
*कोविड १९,* *सावधान *अगर आप जुलाई से अपने बच्चे को स्कूल भेजने की सोच रहे है तो इसे एक बार पूरा पढिए*।लगातार चालीस पचास दिन के लॉकडाउन के बाद अचानक एक दिन...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर में............
अख़बारों का मर्सियारवि अरोड़ाघर में कई अख़बार आते हैं मगर मेरे बच्चे अख़बार नहीं पढ़ते । हालाँकि दुनिया जहान की ख़बर उन्हें मुझसे ज़्यादा रहती है । जब पूछो कि तुम्हें यह सब कैसे पता तो जवाब मिलेगा- नेट...
View Articleमायका / सीमा मधुरिमा
लघुकथा ----मायका ....रोज रोज की रोक टोक से रीमा बहुत ऊब चुकी थी ...उसे जाने क्यों अपनी सासू माँ की हर बात बुरी लगती ...कभी देवर कोई मजाक कर देता तो चिढ़ जातीं नंदों से अक्सर झगड़ा कर बैठती उसके पति राजीव...
View Articleत्रिलोकदीप को इस तरह जाने / विवेक शुक्ला
‘वे दिन वे लोग’-हर बड़ी घटना के गवाह रहे त्रिलोक ‘दिनमान’ दीपशायद पहली बार दिनमान को कनॉट प्लेस की सेंट्रल न्यूज एजेंसी (सीएनए) में 1980 में देखा था। उसके पन्ने पलटे। सब कुछ गंभीर लगा। वही था दिनमान...
View Articleलाचार / रश्मि पाठक
लाचार! (लघुकथा)लॉकडाउन में कोई ऐसा दिन नहीं गया जब घर की सफ़ाई करते समय वो इस तरह न बड़बड़ाती हों-देखो तो डेढ़ सौ गज में बना मकान,हमारे बच्चे यहाँ थे तो कितना छोटा लगता था ,अब कितना बड़ा हो...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर में.........
दुश्मन और भी हैंरवि अरोड़ाचार किताबें पढ़ने का यह असर हुआ कि मैंने दशकों पहले भीख देनी बंद कर दी थी । सयाने लोग बताते भी हैं कि भिखारियों के गिरोह होते हैं । ये लोग हमसे ज़्यादा कमाते हैं । इनकी गोद...
View Articleहर कातिल को शराफत पे छोड़ देंगें केजरीवाल
जेसिका के क़ातिल का छूट जानाजुझारू सबरीना लाल कह रही हैं, वह थक गई हैं. उनकी बहन का हत्यारा सुधर गया हो, तो उसे आज़ाद हो जाने दो.यह सुबह के अख़बार की सुर्खी है. जिसके बारे में जोर की भ्रांति फैली है कि यह...
View Articleये उन दिनों की बात है ज़ब सब अपने लगते थे / त्रिलोकदीप
बात 17 सिंतबर, 1977 की है। सोवियत संघ की यात्रा समाप्त कर अगला ठौर युगोस्लाविया था। सुबह सवेरे बारिश के बीच मॉस्को के अपने होटल से साढ़े पांच बजे निकल गया। एयरपोर्ट डेढ़ घंटा पहले पहुंचना था। वक़्त से...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर में........
मनु शर्माओं की दुनियारवि अरोड़ालगभग आठ-दस पुरानी बात है । एक ख़बर के सिलसिले में मैं डासना ज़िला अधीक्षक के कमरे में बैठा था । वहाँ झक सफ़ेद खद्दरधारी एक नेता जी पहले से बैठे थे । जेल अधीक्षक से बातचीत...
View Articleप्रेम पत्र रोजाना वाक्यात और उपदेश
*परम गुरु हुजूर साहबजी महाराज- रोजाना वाकिआत -15 ,16 अक्टूबर 1932- शनिवार व रविवार:- प्रेम प्रचारक मुद्रित 10 अक्टूबर पढ़कर लाहौर से एक नावाकिफ नौजवान ने जो इस वक्त वहां सेकंड ईयर क्लास में पढ़ता है...
View Articleगाँव में ही है जीत की चाभी / आलोक कुमार
गांव से ही निकलेगा जीत का रास्ता-----अजीब खौफ था। सबकुछ बंद कर दिया गया। अच्छी बात है। हौले से हदस निकल रहा है। चरैवेति चरैवेति। कोरोना अब सम्हलकर जीना सीखा देगा। धीरे धीरे सब खुल रहा है। हम सामान्य...
View Articleरवि अरोड़ा की नजर में.....
खाँचों में बँटी संवेदनारवि अरोड़ाकेरल के मलप्पुरम जिले में पटाखों से भरा अनानास खिला कर की गई एक गर्भवती हथिनी की निर्मम हत्या से पूरे देश में उबाल है । ग़म और ग़ुस्से से सोशल मीडिया के तमाम माध्यम भरे...
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