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Channel: पत्रकारिता / जनसंचार
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केहू नईखे बोलत बा / रामबचन यादव

कोरोना काल की पीड़ाकाल चक्र ई अइसन सबके,चढ़ल कपारे डोलत बा।बड़काभइया शहर सेआइलन, केहू नईखे बोलत बा।।बॉम्बे जइसन शहर में उनकर,चढ़ल   जवानी   बीत   गइल,उनहीं   के  पैसा   से    हमारे,घर  कै  पक्की   भीत...

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शानदार संपादक निहाल सिंह की याद में / त्रिलोकदीप

मेरे पुराने मित्र औऱ शालीन पत्रकार तथा कई अंग्रेज़ी दैनिक समाचारपत्रों के एडिटर रहे एस.निहाल सिंह जिन्हें मैं सुरिंदर जी कहा करता था से कई यादगार मुलाकातें हुई।  7 अक्टूबर, 1980 को बोन के इंसेल होटल से...

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माटी की गंध से लबरेज रिपोर्टिंग की यादें / त्रिलोकदीप

दिनमान के संपादक रघुवीर सहाय ने मुझे एक के बाद एक ऐसे असाइनमेंट दिये जो लंबी दूरी के हुआ करते थे और उनकी बदौलत पूरे राज्य का कमोबेश दर्शन हो जाया करता था। निकलते तो थे हम एक स्टोरी के लिए, मिल जाती थीं...

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मोहक प्रयाग जी की मन मोहक यादें / त्रिलोकदीप

भाई प्रयाग शुक्ल 80 के हो गए ?    भाई Trilok Deep जी की सूचना है कि प्रयाग शुक्ल जी अब श्रेष्ठ  की श्रेणी में आ गए , संभ्रांत और भद्र तो पहले से ही हैं ।    प्रयाग जी दिनमान में थे , हम बतौर ट्रेनी...

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जनता की आवाज़ बनती कांग्रेस / कुमार नरेंद्र सिंह

My article in today's Rashtriya Sahara.जनसंवाद की आवाज बनती कांग्रेसकुमार नरेन्द्र सिंहकोरोना महामारी केवल बीमारी नहीं है, बल्कि उसके कई आयाम हैं। वह मानवीय त्रासदी है. दोषारोपण का औजार है, अंधविश्वास...

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रवि अरोड़ा की नजर me......

एक राजा वो भी थेरवि अरोड़ायह दिसम्बर 1990 की बात है । देश के आठवें प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार कुछ दिन पहले ही गिरी थी । गेम चेंजर बनने की चाह में वी पी सिंह ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशें...

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पत्थरों के (में ) शिल्पकार शिल्पकारी / विवेक शुक्ला

Navbharatimes -रिजर्व बैंक केयक्ष-यक्षीअगर आप मूर्तिशल्पी रामकिंकर बैज के  नाम से परिचित नहीं भी है, तब भी आपने उनकी संसद मार्ग पर स्थित रिजर्व बैंक आफ इंडिया की इमारत के बाहर लगी यक्ष और यक्षी की...

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मैं कौन हूँ / सीमा मधुरिमा

""""मैं कौन हूँ """तुमने पूछा ,"मैं कौन हूँ"तो सुनों , मैं हूँ तथाकथितनारी शक्तिजिसे तुम पूजते होकभी दुर्गा बनाकर तो कभी काली ,अपने मतलब के लिए ,मांगते हो ढेरों आशीर्वाद ,और अगले ही पल देते होइसी शक्ति...

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कौन न जाना चाहे हंगरी में/ त्रिलोकदीप

मुझे हंगरी जाने के तीन अवसर मिले। दो बार 1977 में और तीसरी बार 1980 में पश्चिम जर्मनी का चुनाव कवर करने के बाद बरास्ता ब्रुसेल्स। पहली बार बेलग्राद से हंगरी की राजधानी बुदापेश्त पहुंचा और दूसरी बार...

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रवि अरोड़ा की नजर में......

ख़तरा झूले कारवि अरोड़ालॉकडाउन का समय बड़ों ने बेशक रो-धो के काटा हो मगर बच्चों , किशोर और युवाओं की तो पूरी मौज रही । शहरों में ही नहीं गाँवों में भी युवा पीढ़ी रात रात भर इंटरनेट खेल पबजी में मशगूल...

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मोहक इतिहास के संग पानी और गाइड की महक / त्रिलोकदीप

मेरी गाइड अग्नेश गजब की किस्सागो है। जिन दिनों मैंने हंगरी की यात्रा की थी वहां समाजवादी शासन प्रणाली थी। कहा जा सकता हैं कि ऐसी प्रणाली वाले देशों में पश्चिमी देशों के मुकाबले कम आज़ादी है लेकिन हंगरी...

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महाभारत में ( की ) खोज / रत्न भूषण

चलते चलते...खोज महाभारत के समय कीबी आर चोपड़ा का लोकप्रिय टीवी धारावाहिक महाभारत एक बार फिर टीवी पर प्रसारित हो रहा है। विदेश में भी इसे लगातार दिखाया जा रहा है। रोचक कहानी होना इसकी मुख्य वजह है। यही...

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हंगेरियन जिप्सियों की शालीनता और संगीत से मोहित / त्रिलोकदीप

बुदापेश्त में किसी भी छोटे बड़े होटल में   खाना खाने के लिए चले जाइए आपकी  टेबल के पास आपका मनोरंजन करने के लिए कुछ साजिंदे अपनी वायलिन या गिटार या किसी और संगीत यंत्र के साथ पहुंच जाएंगे और कोई धुन...

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रवि अरोड़ा की नजर में.........

ताली-थाली की लाजरवि अरोड़ाढाई महीने से अधिक हो गये फ़ोन पर कोरोना सम्बंधी कैसेट सुनते हुए ।कहीं भी किसी को भी फ़ोन मिलाओ पहले दो मिनट यह भाषण सुनना पड़ता है कि हमें डाक्टर्स , स्वास्थ्य कर्मी, सफ़ाई...

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रवि अरोड़ा की नजर में .........

लकीर सोनू सूदों कीरवि अरोड़ाअपनी तरफ़ से मैं बहुत कोशिश करता हूँ कि राजनीति और राजनीतिज्ञों पर कम से कम बात की जाये मगर हालत यह है कि मैं तो कंबल छोड़ना चाहता हूँ मगर कंबल मुझे नहीं छोड़ रहा । अब सोनू...

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कोरोना काल / महाकवि व्हाट्स ऐप महाराज

*नाक की पगड़ी*कई सदियों से नाक और सिर में यह तकरार थी तगड़ी,कहती थी नाक, जब मुझ से है इज़्ज़त,तो फिर सिर के पास ही क्यों पगड़ी !!नाक का कहना था,कि सभी मुहावरों में है मेरा फसाना,चाहे वो नाक कटना हो,नाक नीची...

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दिनेश दोहावली / दिनेश श्रीवास्तव

दिनेश-दोहावली                    "दशानन"                    1 - अवगुण कठिन निशाचरी,पर गुणग्राही ज्ञान।वेदशास्त्र ज्ञाता बड़ा, जपता शिव का नाम।।2- तंत्र मंत्र की सिद्धियाँ, विद्याओं का ज्ञान।महारथी था...

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हिंदी शब्द बोध

हिंदी शब्‍द-बोध (5)हिंदी की बिंदी(अनुस्‍वार और चंद्रबिंदु)अध्यापक महोदय ने एक छात्रा के गृहकार्य की काॅपी जांचते हुए पूछा, ‘तुम लिखते समय बिंदी क्यों नहीं लगाती?’अध्यापक महोदयका आशय ‘अनुस्वार’ से...

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जूता / धनंजय सिंह

अब्राहम लिंकन के पिता जूते बनाते थे, जब वह राष्ट्रपति चुने गये तो अमेरिका के अभिजात्य वर्ग को बड़ी ठेस पहुँची!सीनेट के समक्ष जब वह अपना पहला भाषण देने खड़े हुए तो एक सीनेटर ने ऊँची आवाज़ में कहा,...

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श्याम बिहारी श्यामल / यादों का कोना.....

■■■■  संस्मरण 🌺 © श्‍याम बिहारी श्‍यामल  ■■■■■■  वे दिन जो कभी ढले नहीं- 38  ■■■■ जाने-अनजाने, एक से एक दीवाने ■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■विज्ञान चीख-चीख कर कब का निढाल हो चुका है! त्वचा के फूटे-सूखे...

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